‘ रोटी बैंक ‘ एक कोशिश ‘भोजन के अधिकार’ की

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download (2)   ‘रोटी बैंक’ ज़रूरतमंद को घर की बनी रोटी और सब्जी उपलब्ध करवाता है | 40 युवाओं और 5     बुजुर्गों के सहयोग से बुंदेलखंड के पिछड़े हुए इलाके महोबा में शुरू हुआ ये ‘रोटी बैंक’ गरीबों के       घर  – घर जाकर ” भोजन का अधिकार ” को सच करने की कोशिश कर रहा है |

बैंक से जुड़े युवा घर – घर जाकर सामान्य नागरिकों से उनके बैंक के लिए दो रोटी दान करने       के  अनुरोध करते हैं ताकि ज़रूरतमंद को खाना मिल सके, ये प्रयास अप्रैल से शुरू हुआ और         अब एक  आन्दोलन का रूप ले चुका है और बैंक रोज लगभग 400 लोगों को खाना उपलब्ध         कराता है|

‘ रोटी बैंक ‘ सड़क, रेलवे स्टेशन  पर रहने वाले गरीबों बाहर से इलाज के लिए आये मरीजों और उनके सहयोगियों तथा सड़क पर कूड़ा बीनने वाले मजदूरों को खाना देकर उनकी मदद करता है |

इन सभी के लिए ये बच्चे भगवान के समान हैं ग्रुप ने शहर को 8 हिस्सों में बाँट रखा है  प्रत्येक हिस्से का एकत्र किया हुआ भोजन एक निर्धारित जगह पर इकठ्ठा होता है और फिर यह से वितरक टीम अपने काम में लग जाती है, ‘ रोटी बैंक ‘ लोगों से सिर्फ इतना ही कहता है की सिर्फ ताजा खाना ही दान करें |

बैंक बुन्देली समाज के संरक्षण में चल रहा है और दिन प्रतिदिन सहयोगी बढ़ते जा रहे हैं कुछ कैटररस भी आगे आ रहे हैं |

अखंड भारत महोबा वासियों के इस महान सोंच की सराहना करता है और लोगों से अनुरोध करता है की अन्न का एक भी टुकड़ा फेंकने से पहले ये ज़रूर सोंचें कि वो किसी और की भूख शांत कर सकता है |

 

 

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