जो अमेरिका न कर सका सालों में रूस ने कुछ हफ़्तों में ही कर दिखाया

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रूस आजकल सीरिया में दुनिया के सबसे बड़े आतंकी संगठन ISIS को जड़-मूल से समाप्त करने में लगा हुआ है लेकिन अमेरिका को और उसके सहयोगी या फिर कहें तो पिछलग्गू देशों को यह बात बिलकुल भी अच्छी नहीं लग रही है कि रूस ISIS को समाप्त करें I अमेरिकी सरकार के प्रवक्ता के अनुसार रूसी सेना केवल और केवल ISIS को ही निशाना नहीं बना रही है अपितु सीरिया में सरकार विरोधी जो तत्व है उन्हें भी निशाना बना रही है I

puti vs obamaअमेरिका को यह बात इसलिए बुरी लग रही है क्योंकि अमेरिकी सरकार और सेना ने सीरिया में विद्रोहियों को न सिर्फ केवल हथियार ही दिए हैं बल्कि साथ ही साथ उन्हें सैनिकों की सभी ट्रेनिंग भी दी है I इसी ट्रेनिंग की दम पर ही यह हथियार बंद सरकार विरोधी तत्व पिछले एक साल से भी अधिक समय से सीरिया में विद्रोह कर रहे है I

लेकिन रूस अब अमेरिका या फिर उसके पिछलग्गू देशों की बातों और बयानों पर गौर किये बगैर ही आगे बढ़ने का निर्णय कर चुका है और लगातार रूस के हवाई जहाज ISIS के अड्डो पर बमबारी कर रहे है I रूस अब सीरिया में हवाई हमलों के साथ ही साथ अपनी फौज को भी उतार रहा है I

रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने इस ऑपरेशन में कई बड़े ही सख्त कदम उठा लिए हैं उन्होंने पहली बार सुखोई Su-34 स्ट्राइक फाइटर को युद्ध में हिस्सा लेने का आदेश दे दिया है I और इसके अलावा रूसी नौसेना ने 1500 किमी. की दूरी से सीरिया में आईएस के ठिकानों पर क्रूज मिसाइल से हमला कर नाटो को सख्त संदेश दे दिया है। रूसी सेना के दमखम को देखकर सैन्य विशेषज्ञ मान रहे हैं कि कई क्षेत्रों में रूस की टेक्नोलॉजी कई मायनों में अमेरिका से बेहतर है।

जहां एक ओर अमेरिका सीरिया में रूस के बढ़ते दखल से परेशान है वहीं ईरान ने असद सरकार के समर्थन में अपने सैकड़ों सैनिकों को उत्तरी और मध्य सीरिया में तैनात कर दिया है। ईरान के उच्च प्रशिक्षित कंमाडों विद्रोहियों खिलाफ असद समर्थित सेना को ग्राउंड कवर देंगे। सऊदी अरब के एक सैन्य विशेषज्ञ के अनुसार पिछले 4 सालों में पहली बार ईरान ने सीरियाई गृहयुद्ध में अपनी उपस्थिति दर्ज की है। हालांकि, न्यूज एजेंसी एपी के अनुसार ईरानी सैनिक रूसी हवाई हमले के कुछ दिन बाद ही सीरिया पहुंच गए थे।

दरअसल रूस और ईरान दोनों ही इस क्षेत्र में इस्लामिक स्टेट का प्रभाव बढ़ने से रोकना चाहते हैं क्योंकि अमेरिका के बनिस्बत दोनों ही देशों की सीमाएं और हित सीरिया से जुड़े हैं और यदि इस्लामिक स्टेट को रोका नहीं गया तो उनका अगला निशाना शिया बहुल ईरान और रूस का मुस्लिम बहुल क्षेत्र होगा जो मध्यपूर्व के अलावा एशिया में भी अशांति ला सकता है।

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