सात घंटे अस्पताल मे कराहती रही प्रसूता, नहीं हुआ इलाज

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रायबरेली (ब्यूरो)- दो दिन पहले ऊंचाहार सीएचसी मे एक प्रसूता को पाँच हजार रुपये के लिए अस्पताल से भगा देने का मामला अभी ठंडा नहीं हुआ था कि  एक गर्भवती महिला  महिला के साथ अमानवीय व्यवहार का मामला सामने आया है। दर्द से कराहती महिला सात घंटे अस्पताल मे तड़पती रही लेकिन उसको देखने के लिए महिला चिकित्सक नहीं आयी। अंत मे परिजनो ने उसका निजी चिकित्सालय मे इलाज कराया।

मामला मंगलवार रात का है। क्षेत्र के गाँव बसिया की बाग मजरे पट्टी रहस कैथवल निवासी शंकर दास अपनी बहू क्रांति को प्रसव पीड़ा होने पर मंगलवार की रात करीब 12 बजे एंबुलेंस से सीएचसी लाये थे। उनका आरोप है कि रात मे एक नर्स ने उनकी बहू को अस्पताल मे भर्ती कर लिया, लेकिन उसको किसी डाक्टर ने नहीं देखा। क्रांति को यह पहला बच्चा है। उसका पति आशीष बाहर शहर मे रहता है। बूढ़ा ससुर सरकारी अस्पताल मे बहू को लेकर इस उम्मीद से आया था कि उसे इलाज की सुविधा मिलेगी। लेकिन उसकी बहू दर्द से कराहती, तड़पती रही, बूढ़ा ससुर इधर उधर मदद के लिए दौड़ता रहा, लेकिन ड्यूटी की चिकित्सक अपने आवास से बाहर नहीं निकली। दर्द की रात बीत गयी। सुबह के सात बज गए, लेकिन फिर भी किसी की संवेदना दर्द से कराहती महिला के प्रति नहीं जागी तो उसने नर्स से कहा कि हम निजी अस्पताल मे ले जाएगे। इसके

बाद उससे यह लिखित लिया गया कि मेरा मरीज ठीक है इसे हम घर ले जा रहे है। इसके बाद वह अपने गाँव की आशा बहू के साथ प्रसूता को लेकर निजी अस्पताल ले गया। जहां उसका इलाज हुआ तो उसे दर्द से मुक्ति मिली। सीएचसी अधीक्षक डा आरबी सिंह ने बताया कि इस बारे मे उनको किसी ने कोई सूचना नहीं दिया है, मामले  की जांच कराई जाएगी । उधर ड्यूटी मे तैनात रही चिकित्सक डा निधि का कहना है कि नर्स ने उन्हे नहीं बताया कि कोई इस तरह की महिला आयी है, यदि उनको जानकारी हो जाती तो उसका उचित इलाज किया जाता।

रिपोर्ट- राजेश यादव

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