कैकेयी के त्याग ने राम को बनाया भगवान

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रायबरेली। अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर श्रीराम कथा के मनीषियों का व्याख्यान भी महिला शक्ति पर आधारित रहा। उन्होंने आज न सिर्फ मानस के महिला पात्रों का गुणगान किया, यह भी सिद्ध किया कि नारी शक्ति ही सर्वोपरि है।

मानस मर्मज्ञ डा. महेश मिश्र ने बताया कि जो राम पिता की गद्दी लेकर राजा राम तक सिमट जाने वाले थे, उन्हें बिमाता कैकेयी के त्याग एवं बलिदान ने भगवान राम बना दिया। उन्होंने कहाकि यदि कैकेयी सामाजिक अपयश, पति का सानिध्य और पुत्र मोह में विचलित हो गयी होती तो राम का वन गमन न होता, सीता का हरण न होता, रावण का मरण न होता। यदि यह सब न होता तो धरती की भार हरण न होता। जिसके लिए राम का अवतरण हुआ था। आचार्य डा. श्रीराम अनुग्रह मिश्र ने सीता चरित्र का वर्णन सीता शक्ति के रुप में किया। उन्होने बताया कि सीता सामान्य नारी न होकर स्वमेव शक्तिपुंज थी। उनका कहना था कि सीता का जनकपुर में पदार्पण वहां ऋद्धि सिद्धि एवं सम्पदा के साथ हुआ। उन्होंने ‘‘लिए सम्पदा सकल शुभ’’ जैसी तुलसी की चौपाई का उद्धरण दिया। जबकि उनका कहना था कि राम भले ही ब्रम्ह के अवतार माने जाते हो लेकिन उनके जन्म के समय सिर्फ सुख सम्पदाएं प्रतीक रुप में ही सामने दिखी थी। बाबा तुलसी के शब्दों में ‘‘सुख सम्पदा सकल शुभ छाये’’ लेकिन जब सीता विवाहित होकर अयोध्या पहॅुची तभी वहां सुख सम्पदा की वर्षा हुई। अन्य वक्ताओं ने भी कैकेयी, सुमित्रा आदि महिला शक्तियों तक ही अपना वक्तव्य सीमित रखा।
strong>रिपोर्ट – राजेश यादव

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