साहित्य अकादमी में पास हुआ निंदा प्रस्ताव, लेखकों से किया निवेदन अपने सम्मान वापस ले लें

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writers-delhi-protestदेश में हो रही लगातार हिंसा को देखते हुए देश के कई जाने माने लेखकों ने अपना साहित्य सम्मान वापस कर दिया था I लेखकों के द्वारा लगातार सम्मानों की वापसी को देखते हुए आज साहित्य अकादमी के द्वारा एक आपात कालीन बैठक बुलाई गयी I इस बैठक में सर्वसम्मति से एक निंदा प्रस्ताव भी पास किया गया I इस प्रस्ताव में लिखा गया है कि लेखकों के ऊपर हो रही लगातार हिंसा का हम विरोध करते है और साथ ही देश के विभिन्न इलाकों में जो भी हिंसा हो रही है उसका भी हम विरोध करते है I प्रस्ताव के माध्यम से साहित्य अकादमी के लेखकों ने केंद्र और सम्बंधित राज्य सरकारों से इस बात का निवेदन किया कि वह स्थित पर जल्द से जल्द अंकुश लगाए I

आपको बता दें कि आज कुछ लेखकों ने सरकार के विरोध में मार्च निकाल कर लेखकों के ऊपर हो रहे लगातार हमलों का विरोध किया है और वहीं कुछ राष्ट्रवादी विचारधारा के लेखकों ने सरकार के समर्थन में भी मार्च निकाला और उन लेखकों के खिलाफ अपना विरोध जताया जो अपना सम्मान वापस कर रहे है I

सरकार के समर्थन में उतरे प्रसिद्ध लेखक नरेंद्र कोहली ने कहा है कि, “जो लेखक आज के माहौल में अपना सम्मान वापस कर रहे है यह तब कहा चले गए थे जब इंदिरा गाँधी ने पूरे देश में इमरजेंसी की घोषणा कर दी थी I उन्होंने कहा कि यह लेखक तब कहा चले गए थे जब जम्मू-कश्मीर से कश्मीरी पंडितों को उनकी जमीन से बेदखल किया जा रहा था और उन्हें कश्मीर छोड़ने पर विवश किया गया था I उन्होंने सम्मान वापस करने वाले लेखकों के रवैये पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए कहा कि जब पंजाब में आतंकवाद अपने चरम पर था तब इन लेखकों ने अपना सम्मान क्यों वापस नहीं किया I

नरेंद्र कोहली ने कहा कि जब इन लोगों ने तब अपना सम्मान अपने पास ही रखा था उसे वापस नहीं किया तो आज फिर ऐसा यह क्यों कर रहे है I हमें तो ऐसा लगता हैं कि सभी राजनैतिक कारणों से ही सम्मान वापस कर रहे है I आपको बता दें कि देश बढती हिंसा और असहिष्णुता की भावना को देखते हुए अब तक तक़रीबन 40 साहित्यकारों ने अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार वापस कर दिया है I पुरस्कार वापस करने वाले लेखकों में हिंदी के जाने-माने लेखक उदय प्रकाश, नयन तारा सहगल, प्रसिद्ध शायर मुन्नवर राणा भी शामिल है I

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