साइलेंट इमरजेंसी के दौर में औरैया

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प्रतीकात्मक फोटो

औरैया (ब्यूरो)- जनपद के अंदर एक साइलेंट इमरजेंसी का दौर शुरू हो गया है। जिले का स्वास्थ्य महकमा तानाशाही पर उतारू हो गया है। स्वास्थ्य सेवाएं बद से बदतर होती जा रही हैं और जब इन कमियों को मीडिया प्रकाशित करती है, तो कमियां सुधारने की जगह स्वास्थ्य महकमा मीडिया कर्मियों को दबाव में लेने की कोशिश करता है।

जब स्वास्थ्य अधिकारियों की पत्रकारों पर दबाव बनाने या अपनी बात मनवाने की किसी भी तरह से दाल नहीं गलती है, तो समाचार कवरेज रोकने के लिए फर्जी मुकदमों का सहारा लिया जा रहा है। कहने को तो वर्तमान सरकार स्वास्थ्य सेवाओं और सुविधाओं के नाम पर बड़ी-बड़ी बातें करती हैं साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े बदलाव की बातें भी की जाती हैं। लेकिन स्थितियां बिल्कुल अलग हैं स्वास्थ्य सेवाएं पहले से बदतर स्थिति में जा चुकी हैं भाजपा नेता जिस बदलाव की बात करते हैं वह बदलाव कहीं भी नहीं दिखाई पड़ता है बदलाव दिखाई पड़ता है तो केवल स्वास्थ्य महकमे  के जिम्मेदार डॉक्टरों के रवैये मैं।

चिचोली स्थित  100 सैया अस्पताल मैं स्वास्थ्य सेवाएं अपना दम तोड़ चुकी है ।अस्पताल प्रशासन के अधिकारियों का रवैया बदल चुका है। कमियां उजागर करने वाले पत्रकारों पर पूर्व से विवादित रहे डॉक्टर द्वारा फर्जी मुकदमा लिखवाकर समाचार कवरेज करने से रोका जा रहा है। अस्पताल प्रशासन का रवैया आपातकाल के दौर को याद करवाने के लिए काफी है। उस समय भी सरकार द्वारा मीडिया पर सरकार की कमियां छापने पर पाबंदियां लगा दी गई थी। ठीक वैसे ही हालात यहां पर भी देखने को मिल रहे हैं। अस्पताल प्रशासन मीडिया को अस्पताल की कमियां लिखने के लिए मना कर रहा है जिसके लिए तरह तरह से पत्रकारों पर दबाव भी बनाया जा रहा है। और जब पत्रकार अस्पताल प्रशासन के दबाव में नहीं आ रहे हैं, तो पत्रकारों पर विवादित डॉक्टर द्वारा फर्जी मुकदमा लिखवा दिया जाता है गौरतलब है कि 100 सैया अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं की बुनियाद ही खत्म हो गई है।

यह अस्पताल अस्पताल के नाम पर केवल रेफर सेंटर बनकर रह गया है। यहां पर उपस्थित डॉक्टर और अधीक्षक मरीज को रेफर कर अपने कर्तव्य की इति श्री कर लेते हैं ।डॉक्टर कभी भी समय से अपने कार्यालय में उपस्थित नहीं होते हैं, शासन द्वारा कम दर पर उपलब्ध स्वास्थ्य जांच का लाभ  भी अस्पताल कर्मियों की वजह से आम आदमियों को नहीं मिल पाता है ।जिसको लेकर लोक भारती अखबार ने ने एक मुहिम चलाई और अस्पताल में व्याप्त कमियों और डॉक्टरों की मनमानी पर जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया जिस पर सी एम एस 100 सैया अस्पताल ने पत्रकारों को बुलाकर उन्हें अस्पताल की कमियां प्रकाशित ना करने की  सख्त हिदायत दी। और ना मानने पर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी। पत्रकारों ने जब दबाव मानने से इनकार कर दिया तो अस्पताल अधीक्षक ने अपने पूर्व से ही विवादित रहे डॉक्टर डालचंद को आगे कर पत्रकारों पर फर्जी मुकदमे लिखवा दिए । अस्पताल प्रशासन के इस बर्ताव की वजह से औरैया जनपद में आपातकाल के बाद के सबसे बुरे दौर का आगाज हो चुका है।

कौन है डॉक्टर डालचंद्र-
रिपोर्ट दर्ज कराने वाले डॉक्टर डालचंद्र पहले से ही विवादित रहे हैं। बिधूना सीएचसी में तैनाती के दौरान अपनी लेटलतीफी के चलते इनका तत्कालीन सीएससी प्रभारी डॉक्टर उदैनिया से हाथापाई भी हो गई थी। जिस पर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इसके बाद जिला अस्पताल में भी तैनाती के समय सीएमओ डॉक्टर करन सिंह से भी इनका विवाद हुआ था। जिस पर तत्कालीन सीएमओ ने डॉक्टर डालचंद्र के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने डॉक्टर डालचंद्र को गिरफ्तार भी किया था और वह जेल भी गए थे। जिस पर स्वास्थ्य विभाग ने इन्हें निलंबित भी किया था।

पत्रकारों पर मुकदमा, अधिकारों का हनन -सौरभ भूषण
इस संबंध में जब सदर ब्लाक प्रमुख सौरभ भूषण शर्मा से बात की गई जिस पर उन्होंने बताया कि पत्रकारों पर फर्जी मुकदमा लिखाना उनकों अधिकारों का हनन होना है। पत्रकारों का स्वतंत्रता के साथ समाचार संकलन करना उनका अधिकार है। पत्रकारों पर मिथ्या आरोप लगाकर उनका हनन करना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जब सरकारी अधिकारी पत्रकारों पर मुकदमा लिखाने लगेंगे तो फिर भला वह समाचारों का संकलन कैसे करेंगे। मुकदमा लिखाना पत्रकारों पर कुठाराघात करने के समान है।

दोनो पक्षों के सुने बगैर मुकदमा दर्ज करना पुलिस की गलत- रमेश दिवाकर
भाजपा के सदर विधायक रमेश दिवाकर से उक्त मामले में बात करने पर उन्होंने बताया कि दोनो पक्षों को बगैर सुने पत्रकारों पर मुकदमा दर्ज करना पुलिस की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह लगाता है। समाज का चौथा स्तंभ होने के बाबजूद मीडिया के लोगों के अधिकारों का हनन करना लोकतंत्र का अपमान करना है। मामले को लेकर सीएमएस व पुलिस के अधिकारियों से बात की जाएगी। किसी भी कीमत पर पत्रकारों का अपमान नहीं होने दिया जाएगा। पत्रकार को किसी भी सरकारी विभाग में जाने पर रोक नहीं है।

वर्तमान सरकार में पत्रकारों की सुरक्षा रामभरोसे-अनूप गुप्ता
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता अनूप गुप्ता ने कहा कि वर्तमान सरकार में पत्रकारों की सुरक्षा राम भरोसे है। अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा पत्रकारों पर बिना सोचे-समझे मुकदमा दर्ज करना चिंता का विषय है। इस प्रकार के मामलों से पत्रकारिता के अधिकारों का हनन होना है। वहीं पुलिस को भी तत्काल प्रभाव मुकदमा दर्ज करना नितांत अशोभनीय है। पुलिस को मुकदमा दर्ज करते समय पत्रकारों को भी विश्वास में लेना चाहिए था। ऐसा न करके पुलिस ने अपने आप पर सवालिया निशान लगाए हैं। जिससे प्रतीत होता है कि पुलिस प्रशासन भी एकतरफा कार्रवाई कर पत्रकारों के उत्पडन को बढावा देने में सहभागिता कर रही है।

रिपोर्ट- मनोज कुमार

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