धूमधाम से मनाई गई संत कबीर दास की जयंती

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डोंगरगढ/छत्तीसगढ़– ऊपर मंदिर प्राँगण में बनी सन्त कबीर साहब की मंदिर में कबीर जयंती के कार्यक्रम को डोंगरगढ़ के मानिकपुरी समाज के द्वारा मनाई गई इस कार्यक्रम में डोंगरगढ नगर पालिका अध्यक्ष तरुण हथेल मुख्यातिथि, कार्यक्रम की अध्यक्षता अशोक साहू ट्रस्टी और प्रदेश पदाधिकारियों की उपस्थिति में जयंती मनाई गई|

सभी वक्ताओ ने कबीर साहब के ग्रँथों में प्रकाश डाला| तरुण हथेल ने अपने उद्बोधन में कहा कि कबीर साहब जैसे महापुरुष दुनिया मे कभी दुबारा पैदा नही हुआ| कबीर साहब सन्त सुदर्शन के चौथे अवतार है| खुद कबीर के ग्रँथों में यह स्प्ष्ट मिलता है कबीर दास जी का जन्म 1440 वाराणसी में हुआ| लहरतरा के पास तलाब में पहले संत हुये जिन्हें सारे समाज के लोग पूजते है| पहला ग्रन्थ कबीर की वाणी का संग्रह बीजक शिष्य धर्मदास द्वारा संकलित किया गया| बीजक के 3 भाग रमैनी, सबद, साखी जब सिकन्दर लोदी का शासन था, इसी समय कबीर ने मानवता का सन्देश दुनिया को दिया| कोई धर्म, जाति , ऊंच, नीच, नही केवल मानव सेवा ही ईश्वर की सच्ची भक्ति है सन्त रहते हुए भी परिवार की जिम्मेदारी उठाई 1510 ई में स्वर्ग सिधार गए| जीवन भर के लिये दुनिया में अमर हो गए|

आज उनके लिखे हुये ग्रँथों को समाज का आईना बन गया| मुझे विश्वास है 577 वी जयंती के हम सब संकल्प ले कि कबीर शहाब के बताए हुए मार्ग पर चलेंगे देश और समाज का जन कल्याण करेंगे| इस कार्यक्रम में मानिक पूरी समाज के महिला पुरुष और भी दूर दराज के गाँव के आये हुए मानिक पूरी समाज के लोगो ने यहां पहुचकर संत कबीर दास जी की जयंती को बड़े धूम धाम से मनाया गया ।

रिपोर्ट- महेंद्र शर्मा (बंटी)/हरदीप छाबड़ा

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