सकारात्मक सोच रख धैर्यवान बनें शिव का भस्म से होता है श्रृंगार

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मैनपुरी (ब्यूरो)- श्री एकरसानन्द आश्रम में चल रही श्री शिव महापुराण कथा के दौरान कथा व्यास आचार्य महेशचन्द्र मिश्र ने कहा कि शिवपुराण का सुनना अमृत पान के समान है। इस संसार में अज्ञात के कारण ही अशांति फैली हुई है। ज्ञान के लिए हर दिन ध्यान लगाने की जरूरत है।

उन्होने कहा कि यूँ तो शिव को संहार का देवता कहा जाता है लेकिन सर्व शक्तिमान होते हुए भी वे दयालु और कृपालु हैं। वह प्रकृति से बहुत प्रेम करते हैं, शिव का श्रृंगार धतूरे के फूलों, पत्रों के साथ भस्म से हेाता है। भस्म से हमें यह शिक्षा मिलती है कि शरीर नश्वर है तथा आत्मा को अन्त में परमात्मा में ही मिल जाना है। शिव का गुणगान ही इस पुराण कथा का सार है। शिव की भक्ति सहज है हमें उसके लिए विशेष साधना की जरूरत नहीं है। भोलेनाथ भव के भूखे हैं जहां वे सज्जनों के लिए भोले हैं वहीं दुष्टों के संहार के लिए भाले की तरह है।

कथा से पूर्व यजमान जानकी प्रसाद सक्सैना छतरपुर ने महामण्डलेश्वर स्वामी हरिहरानन्द सरस्वती व कथा व्यास का पूजन किया। कथा में आचार्य कृष्णानन्द पाण्डे, अनिल त्रिपाठी, रामसागर, गोविन्द दीक्षित, सूर्यकान्त त्रिपाठी, वेदप्रकाश पालीवाल, रामखिलाड़ी आदि उपस्थित रहे।

रिपोर्ट- दीपक शर्मा

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