समाजवाद की असलियत – ओमकार राय

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1656240_749448385109175_7535731761502708339_n     जब समाजवाद अपने चरम पर होता है तो राष्ट्रवाद और आदर्शवाद का भक्षण कर लेता है ( दास   कैपिटल –      कार्ल मार्कस)………..

मुलायम सिंह यादव जी ने कुछ भी गलत नही किया जो नियम कहता है जिस नियम का पालन पार्टी करती है वो  नेता जी ने किया ऐसा हमारे यहाँ अनपढों की फौज है बावले है सब के सब जाने बूझे कुछ नही लगे बुक्का  फाड़ने……..
ये सिद्धान्त है समाजवाद का की जो अधिकारी वर्ग या पूँजीपति तुम्हारे वर्ग का ना हो उसको जिस तरह से हो सके  दबा दो…….
अब साधारण सा सवाल है कि पक्ष किसका रखा जा रहा है पक्ष रखा तो अमिताभ ठाकुर जी का ही बेहद ईमानदार और प्रभावी अधिकारीयों में से एक …………..पर जब खनन का पैसा सीधे परिवार को मजबूत करने के लिये जा रहा हो और कोई आरटीआई डाल के पेट पे लात मार दे तब तो भाई कोई भी हो थोडा तैश में आ ही जाता है और पूर्व रक्षामंत्री जी पहले तबते तेप पलदेत उतलपल्देत रेप योजना का क्रियान्वयन कर चुके है ………..
असल में नेताजी तो कम है इनके युवजन से लेकर लोहिया वाहिनी तक फैले तबादले वाले माफियाओं पर कोई आवाज नही उठाता ………..अगर किसी वर्ग विशेष के नौजवान ने आवाज उठा दिया तो ये एकदम से उपर उठाने में महारथ रखते है और कुछ विशेष लोग है जो अपने काली कोट के लिये माफी तक मनवाना चाहते है और कुछ युवा साथियों से अनुरोध है समाजवाद चरम पर है अपनें………….है कोई समाजवादी जो बता सके कि प्रदेश जल रहा है या समाजवाद की किस विचारधारा का पालन हो रहा है जिसमें सबको बराबर का हक मिलें सर्वहारा वर्ग की प्रधानता हो खैर समाजवाद की टोपी लगा लेने से कोई समाजवादी नही हो जाता……………

ओमकार राय
जिलासहसंयोजक भाजयुमो
आईटी प्रकोष्ठ मऊ
प्रमुख महाजनसम्पर्क परदहाँ
मऊ

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