संघ की बैठक मे शिक्षको को जबरन नौकरी से निकालने की नीति तैयार

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रोसड़ा/समस्तीपुर (ब्यूरो)- बिहार की नई सरकार द्वारा शिक्षा विभाग के समीक्षा बैठक के बाद जो खबरें आ रही हैं, वह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है| शिक्षकों के भयादोहन और उन्हें प्रताड़ित करने वाले इस प्रकार के सरकारी सोच तुगलकी विचारों को उजागर करता है| TET, STET उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ (गोप गुट) शिक्षकों के भयादोहन के नीति का कड़ा विरोध करती है| उक्त बातें स्थानीय संघ भवन में संघ के एक विशेष बैठक को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष अशोक कुमार साहू ने कही|

साथ ही कहा कि सरकार शिक्षकों की जवाबदेही तय करने की बात कर रही है और इनको सजा का भय दिखा रही है जबकि हकीकत यह है कि शैक्षणिक सत्र 2017-19 के 5 महिने बीत जाने के बाद भी आज तक पाठ्य-पुस्तक उपलब्ध नहीं हैं| RTE act के तहत 31 मार्च 2015 तक हीं प्रत्येक 30 बच्चों पर एक शिक्षक की बहाली करनी थी जो अबतक नहीं हुई है|

माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों की स्थिति खस्ताहाल है| शिक्षकों को हमेशा गैर शैक्षणिक गतिविधियों में उलझाकर रखा जाता है| यह सब किसकी गलती है? इसके लिए भी जवाबदेही तय होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के लिए भी सजा होनी चाहिए|

संघ मानता है कि इसकी सबसे पहली जवाबदेही और दोषी खुद वर्तमान सरकार और माननीय मुख्यमंत्री जी हैं| अतः वो इन नाकामियों की जिम्मेदारी लें| सरकार की यह पूरी कवायद ‘ Fair & Lovely ‘ स्कीम है, सरकार का चेहरा चमकाने की कोशिश मात्र है| सरकार शिक्षा में सचमुच सुधार चाहती है और मंशा साफ है तो कोठारी आयोग एवं खुद के हीं द्वारा बनाए गए मुचकुन्द दुबे आयोग की सिफारिशों को लागू करें|

मुख्यमंत्री से लेकर खेत-मजदूर तक DM से लेकर चपरासी तक के बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ना अनिवार्य किया जाए. शिक्षकों को समान कार्य के बदले समान वेतन तथा समान सेवा शर्त दिया जाए| शिक्षा को वित्त से अलग किया जाय| गैर शैक्षणिक कार्यों से शिक्षकों को मुक्त कर भयमुक्त शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध हो| ससमय वेतन भुगतान हो, जिससे कि शिक्षक स्वस्थ मानसिक स्थिति में शैक्षणिक कार्य कर सकें. इसके बगैर शिक्षा में सुधार की बात करना बेमानी है|

रिपोर्ट- रंजीत कुमार 

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