महेंद्र सिंह धोनी से बहुत बेहतर है सौरभ गांगुली

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CRICKET-IND-AUSभारत में अगर क्रिकेट की बात हो और अगर वह बात सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविण, वीवीएस लक्षमण आदि का जिक्र किये बगैर ख़त्म हो जाय यह तो असंभव ही होगा और यदि बात कप्तानों की हो तो वह बात शायद तब तक पूरी नहीं होगी जब तक उसमें महेंद्र सिंह धोनी और सौरव गांगुली का जिक्र नहीं किया जाय |

अगर हम विश्व के सबसे महानतम कप्तानों की भी बात करें तो उसमें भी सौरव गांगुली और महेंद्र सिंह धोनी का नाम बहुत ही ऊपर और बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है | खासकर हिन्दुस्तान में अक्सर इस बात पर तीखी बहस होती है कि दादा (सौरव गांगुली) और एमएस (महेंद्र सिंह धोनी) में भारत का सबसे बेहतर कप्तान, सबसे महानतम कप्तान कौन है ?

आखिर आज भी धोनी से बेहतर क्यों है दादा ?
अगर हम यह बात करते है तो की दादा और धोनी में से भारत का सबसे सफलतम कप्तान कौन है कहा यही जाता है कि सबसे बेहतर कप्तान तो दादा ही थे | इसके पीछे अगर हम जानकारों की मानें तो उनकी बेहद संजीदा और सधी हुई टिपण्णी होती है | जानकार मानते है कि धोनी की कप्तानी में भले ही टीम इंडिया ने बहुत सारे मैच जीते है लेकिन उन्हें इस काबिल बनाया तो दादा ने ही है | धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया ने रिकार्ड बनाये है लेकिन टीम तो दादा ने ही बनायीं है | कहा जाता है कि धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया ने जीत दर्ज की है लेकिन दादा ने टीम को जीतना सिखाया है जो सबसे बड़ी जीत है |

मैच फिक्सिंग की मार झेल रही टीम इंडिया में भर दिया था जोश-
बंगाल टाइगर के नाम से मशहूर विश्व क्रिकेट के इस दिग्गज खिलाड़ी को भारतीय टीम की कमान उस वक्त सौंपी गयी थी जब भारतीय टीम न केवल मैच और टूर्नामेंट ही हार रही थी बल्कि वह अपने हौसले और बुलंद इरादों, जीत की इच्छाशक्ति को भी हार चुकी थी | ऐसे मुश्किल समय में भारतीय टीम की जिम्मेदारी दादा के कन्धों पर डाली गयी थी | बस उसके बाद क्या था दादा ने विश्वक्रिकेट को अपनी दादागिरी दिखानी शुरू कर दी और अक्सर मैच हार जाने वाली, अपने हौसले हार चुकी टीम इंडिया ने विरोधियों पर ऐसे पलटवार करना शुरू किया कि इंग्लैण्ड से लेकर आस्ट्रेलिया तक भारत का डंका बज गया | दादा ने टीम इंडिया की कमान 2000 में संभाली थी उसके बाद उन्होंने भारतीय टीम को विश्व पटल पर एक ऐसी टीम बनाकर छोड़ा जिसने कभी हार नहीं मानी जबकि कैप्टन कूल को एक बनी बनायीं टीम मिली थी जिसे दादा ने दादागिरी करना सिखा दिया था, जो टीम पहले ही जीतना सीख चुकी थी |

team india को टीम इंडिया बनाया है दादा ने-
जी हाँ team india को अगर किसी ने टीम इंडिया बनाया है तो उसका पूरा का पूरा श्रेय दादा को जाता है | दादा ने भारतीय टीम को दुनिया के सबसे बेहतरीन ओपनर वीरेंदर सहवाग से नवाज़ा था जिसने अपनी बल्लेबाजी से ऐसा तूफ़ान मचाया कि पूरी दुनिया के गेंदबाजों के हौसले पस्त हो गए |

दादा ने ही भारत को युवराज सिंह, जाहिर खान, कैप्टन कूल महेंद्र सिंह धोनी, मोहम्मद कैफ और हरभजन सरीखे दिग्गज खिलाड़ी दिए | दादा ही वह हस्ती थी जिन्होंने मैच फिक्सिंग के आरोपों में फंसी टीम इंडिया को बाहर निकाला | वर्ष 2001 में एक टेस्ट सीरीज़ में गांगुली ने टॉस के लिए ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव वॉ को इंतज़ार करवया जिसके बाद विश्व क्रिकेट में खूब बवाल मचा था | इसके अलावा जब दादा ने क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले लार्ड्स में अपनी टी शर्ट उतारकर लहरा दी थी पूरी दुनिया भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों ने दादा को जमकर सराहा था | बंगाल टाइगर ने न केवल भारतीय टीम को लड़ना सिखाया था बल्कि एक टाइगर की ही भांति विरोधी टीम की आँखों में आँख डालकर मैच जीतना भी सिखाया था |

रिकार्ड के मामले में भी धोनी से बेहतर है दादा –
अगर हम रिकार्ड की बात करें तो इस मामले में भी दादा माही से बेहतर ही है | विदेशी धरती पर महेंद्र सिंह धोनी ने 30 टेस्ट मैचों में से मात्र 6 मैचों में जीत दर्ज की है जबकि अगर हम बात दादा की करें तो दादा ने विदेशी धरती पर 28 में से 11 मैचों में जीत दर्ज की है |

और इतना ही नहीं अगर हम ब्यक्तिगत स्कोर और रन औसत की बात करें तो उसमें भी दादा धोनी से बेहतर ही है | दादा ने 40.23 की औसत से रन बनाए जबकि विदेश में धोनी का औसत 31.85 रहा है |

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