आतंकियों को दिये जाने वाले 300 करोंड रूपये नगद और 300 किलो सोना हुआ गायब, सुप्रीमकोर्ट ने असम के DGP, असम सरकार और केंद्र सरकार से माँगा जवाब

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दिल्ली- असम से दो साल पहले अचानक से गायब हुए 300 करोंड रूपये नगद और 3 क्विंटल सोने के मामले में आज सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है | सुप्रीमकोर्ट ने आज इस मामले में केंद्र सरकार, असम सरकार औऱ असम के डीजीपी से 6 हफ्ते के भीतर जवाब देने को कहा है | ज्ञात हो कि असम से दो साल पहले 300 करोड़ रुपए नगद, 3 क्विंटल सोना और 2 एके 47 राइफल रहस्यमयी ढंग से गायब हो गयी थी ये सभी असम के बोडो उग्रवादियों को दिए जाने वाले थे |

क्या कहा सुप्रीमकोर्ट ने –
आज इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीमकोर्ट के चीफ जस्टिस टी एस ठाकुर ने कहा है कि यह मामला बेहद गंभीर है | हम यह जानना चाहते है कि आखिर उस सोने और पैसे तथा रायफलों के साथ क्या हुआ | सुप्रीमकोर्ट ने सीधे केंद्र सरकार, असम की सरकार और असम पुलिस के DGP को आदेश दिया है कि 6 हफ़्तों के भीतर मामले की पूरी जांच करके जवाब दिया जाय | अब इस मामले की अगली सुनवाई 6 हफ़्तों बाद होगी |

ख़ुफ़िया विभाग के पूर्व अधिकारी ने दायर की थी याचिका –
देश की सर्वोच्च अदालत में खुफिया विभाग के एक पूर्व अधिकारी मनोज कौशल ने यह याचिका दायर की थी | याचिका में मनोज कौशल ने मांग की थी इस मामले में शामिल लोगों पर कार्रवाई की जाए और खजाने का पता लगाया जाए, उन्होंने कहा है कि खजाने का पता लगाकर उसे भारत सरकार के खजाने में जमा कराया जाना चाहिए |

जानें क्या है 300 करोंड रूपये नगद, 3 क्विंटल सोने और ए.के. 47 रायफलों का राज –
ख़ुफ़िया विभाग के पूर्व अधिकारी मनोज कौशल का कहना है कि दो साल पहले जब वो असम में तैनात थे, तब बोडो उग्रवादी अक्सर वहां के व्यापारियों से वसूली करते थे | इन उग्रवादियों को देने के लिए करीब ढाई साल पहले 2014 में असम टी ओनर्स एसोसिएशन के अध्‍यक्ष मृदुल भट्टाचार्य ने 300 करोड़ रुपये, 3 क्विंटल सोने के अलावा 2 ऐके 47 राइफल चाय बगान में छुपा के रखे थे |

ताकि इस खजाने को उग्रवादियों को समय आने पर दिया जा सके | इस खजाने के बागान में छुपाए जाने की जानकारी केवल भट्टाचार्य को थी | लेकिन तीन साल पहले मृदुल भट्टाचार्य और उनकी पत्नी रीता को उनके तिनसुकिया वाले बँगले में ही जलाकर मार दिया गया | इसके बाद मनोज कौशल ने कोर्ट को बताया कि जब उन्होने इस हत्याकांड की जांच की तो उन्हें खजाने के छुपाए जाने का पता चल गया, जहाँ उसे छुपाया गया था |

उन्होंने कहा कि अब चूंकि वो खुफिया विभाग के अधिकारी थे, इसलिए उन्होने इसकी जानकारी सेना के अधिकारियों को दी | सेना ने तय किया कि 1जून 2014 को खुदाई कर सोना निकाल किया जाएगा | लेकिन कुछ अधिकारियों के कारण यह सूचना लीक हो गई | कुछ लोगों ने 30 मई की रात में ही खुदाई कर सोना निकाल लिया |

कौशल ने अदालत को बताया कि उन्होंने इसकी शिकायत आला अधिकारियों से की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ | लिहाजा अंत में उन्हें अदालत की शरण में आना पड़ा | अब कोर्ट ने आदेश दिया है कि सोना चोरी करने वाले का पता लगाया जाए और जानकारी लीक करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए | कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी आदेश दिया है कि मामले की जांच करके 6 हफ़्तों के भीतर कोर्ट में अपना जवाब दिया जाय | साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने असम सरकार और असम के DGP को भी कहा है कि 6 हफ्ते के भीतर वे भी जवाब दें |

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