SC के निर्णय का बनारस में शिक्षामित्रों ने किया विरोध

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वाराणसी(ब्यूरो)- यूपी के 1.72 लाख शिक्षामित्रों पर मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आए फैसले के खिलाफ पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में शिक्षामित्रों ने विद्रोह शुरु कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिक्षामित्रों को समय सीमा में टीईटी की बाध्यता कर दिए जाने से शिक्षामित्रों का कहना है कि हमे न्याय नहीं मिला है जिससे हमारी रोजी-रोटी पर संकट मडराने लगा है। फैसले के खिलाफ शिक्षामित्रों ने भारत माता मंदिर पर धरना प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र सौंपा। जिसमे शिक्षामित्रों ने पूरे प्रकरण में सीएम योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप कर न्याय की गुहार लगाई है।

हमारे ऊपर होती रही है राजनीति-
शिक्षामित्रों ने कहा कि चंद रुपये की पगार पाकर हम लोगों ने सरकार की सेवा की। बच्चों की भविष्य के खातिर उन्हें पढ़ाया और सरकार के कामों को भी किया मगर अब हम लोगों का भविष्य अधर में है। शुरुआत से ही हमें लेकर राजनीति होती रही है। जबसे सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया है पूरे प्रदेश के शिक्षामित्रों के परिवार में हाहाकार मचा हुआ है। हाईकोर्ट के बाद जब हम सुप्रीमकोर्ट पहुंचे तो हमे पूरी उम्मीद थी कि हमें न्याय मिलेगा, मगर दो वर्षों में टीईटी पास करना आसान नहीं है क्योंकि प्रत्येक वर्ष लाखों लोग बीएड करके टीईटी करते है बाबजूद इसके सफलता नहीं मिल पाती।

पीएम और सीएम से आस-
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी जयकरन यादव को आदर्श समायोजित शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन से जुड़े शिक्षामित्रों ने मुख्यमंत्री को संबोधित अपना ज्ञापन सौंपा। जिसके बाद जिलाध्यक्ष अमरेंद्र दुबे ने कहा कि अब हमारी अंतिम आस पीएम मोदी और सीएम योगी से है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश में शिक्षामित्र आत्मघाती कदम उठाने लगे है। उन्होंने बताया कि हमने मुख्यमंत्री से मांग की है कि हमारे समायोजन के लिए यदि अध्यादेश लाना पड़े तो केंद्र लाए। इसके साथ ही सीएम से मांग किया कि एक काम एक वेतन लागू हो ताकि शिक्षामित्र आत्मघाती कदम न उठाएं।

रिपोर्ट- सर्वेश कुमार यादव 

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