सुप्रीम कोर्ट – राष्ट्रगान फिल्म या डाक्यूमेंट्री का हिस्सा हो तो खड़ा होना जरूरी नहीं

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नई दिल्ती- सिनेमाघरों में राष्ट्रगान के दौरान खड़े होने के मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश पर रोक लगाने और उसे वापस लेने से इनकार कर दिया। देश की सर्वोच्च न्यायालय ने अपने पुराने आदेश को और स्पष्ट करते हुए कहा कि किसी सिनेमा, न्यूजरील या डाक्यूमेंट्री में राष्ट्रगान का इस्तेमाल किया गया है और वो उसका हिस्सा हो तो लोगों को खड़े होने की जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी साफ किया कि सिनेमाघरों में राष्ट्रगान के वक्त लोगों को खड़ा होना पड़ेगा लेकिन ये जरूरी नहीं कि वे राष्ट्रगान गाएं।

बता दें कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का समर्थन किया है। मामले में कोर्ट में सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा, ये सवाल देश के नागरिकों की देशभक्ति की भावना दिखाने का है। जब इसे लेकर कोई कानून नहीं है तो सुप्रीम कोर्ट का आदेश अहम हो जाता है। राष्ट्रगान को सिनेमाघरों के अलावा सभी स्कूलों में जरूरी किया जाए क्योंकि देशभक्ति की भावना की शुरुआत बच्चों से की जानी चाहिए।

बता दें कि राष्ट्रगान के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक आदेश दिया था। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सिनेमा हॉल और मल्टीप्लेक्स में अब फिल्मों को दिखाने से पहले राष्ट्रगान बजाना अनिवार्य होगा। इसके अलावा राष्ट्रगान बजाने के दौरान स्क्रीन पर तिरंगा भी दिखाना जरूरी होगा और राष्ट्रगान को सम्मान देने के लिए दर्शकों को अपनी जगह पर खड़ा भी होना पड़ेगा। इसके साथ ही कोर्ट राष्ट्रगान को फायदे के लिए इस्तेमाल ना करने का भी निर्देश दिया था।
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