देश भर में दलित प्रदर्शनकारियों ने मचाया बवाल, जानें पूरा मामला…

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नई दिल्ली- देश भर में चल रहा दलित विरोधी आंदोलन थमने का नाम नही ले रहा है. आइये जानते है क्या है ये पूरा मामला और देश में इसे लेकर क्या है माहौल.

क्या है SC/ST एक्ट-
यह अधिनियम अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के विरुद्ध किए गए अपराधों के निवारण के लिए है, अधिनियम ऐसे अपराधों के संबंध में मुकदमा चलाने तथा ऐसे अपराधों से पीड़ित व्यक्तियों के लिए राहत एवं पुनर्वास का प्रावधान करता है. सामान्य बोलचाल की भाषा में यह अधिनियम अत्याचार निवारण (Prevention of Atrocities) या अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम कहलाता है. यह अधिनियम 11 सितंबर, 1989 को अधिनियमित किया गया था जबकि 30 जनवरी, 1990 से जम्मू-कश्मीर को छोड़कर संपूर्ण भारत में लागू है. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत किए गए अपराध गैर-जमानती (Non Bailable), संज्ञेय (cognizable) तथा अशमनीय (Non-Compoundable) हैं।

ये हुए बदलाव-
1.एससी/एसटी एक्ट में जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल संबंधी शिकायत पर तुरंत मामला दर्ज होता था.
2.ऐसे मामलों में जांच केवल इंस्पेक्टर रैंक के पुलिस अफसर ही करते थे.
3.इन मामलों में केस दर्ज होने के बाद तुरंत गिरफ्तारी का भी प्रावधान था.
4.इस तरह के मामलों में अग्रिम जमानत नहीं मिलती थी. सिर्फ हाईकोर्ट से ही नियमित जमानत मिल सकती थी.
सरकारी कर्मचारी के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दायर करने से पहले जांच एजेंसी को अथॉरिटी से इजाजत नहीं लेनी होती थी.
5. एससी/एसटी मामलों की सुनवाई सिर्फ स्पेशल कोर्ट में होती थी.

कैसे शुरू हुआ मामला- 

मामला 2009 महाराष्ट्र का है. महाराष्ट्र के गवर्नमेंट फार्मेसी कॉलेज में एक दलित कर्मचारी की तरफ से फर्स्ट क्लास के दो अधिकारियों के खिलाफ कानूनी धाराओं के तहत शिकायत दर्ज कराने पर पुलिस अधिकारी ने जांच के लिए अधिकारियों से लिखित निर्देश मांगे. इंस्टिट्यूट प्रभारी डॉक्टर सुभाष काशीनाथ महाजन ने लिखित में कोई निर्देश नहीं दिया. जिसके बाद दलित कर्मचारी ने सुभाष महाजन पर शियाकत दर्ज कराई.

जिसके बाद महाजन ने हाईकोर्ट से मामला रद्द करने की मांग की, लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी ये अर्जी ठुकरा दी. जिसके बाद महाजन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. जहां उनके खिलाफ एफआईआर हटाने के निर्देश दिए गए और ST/SC एक्ट के तहत तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी. इस मामले के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि ST/SC एक्ट के तहत गिरफ्तारी न की जाए. बल्कि अग्रिम जमानत की मंजूरी दी जाए.

शुरू हुआ विरोध-
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का विरोध करने के लिए देश के कई हिस्सो से कई दलित संगठन सामने आ गए. विरोधियों की मांग थी कि इस फैसले को बदला जाए. उनका कहना था कि इस फैसले से लोगो का दलितो को लेकर रवैया हुत खराब हो जाएगा. लोग उनपर अत्याचार करना शुरू कर देगें जिसका दलितो पर बुरा असर पड़ेगा. धीरे धीरे इस मामले की चिंगारी ने आग पकड़ ली. और मामला इतना बढ़ गया कि आज देश में दलित ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले में बदलाव को आंदोलन का नाम दे दिया है.

देश भर में इसे आंदोलन को लेकर दलित समाज सड़को पर उतर आया है. मामला इतना बढ़ गया है कि लोग मारपीट व तोड़फोड़ पर तर आए है. सरकार भी इस मामले पर विचार करने को मजबूर हो गई है. विरोध की आग में यूपी-बिहार, राजस्थान सहित कई राज्य जल रहे हैं. भारत बंद का देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़ा असर देखने को मिल रहा है. प्रदर्शनकारियों  ने कई जगहों पर आगजनी और तोड़फोड़ की है.

सरकार का रूख-
 ST/SC Act को लेकर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ सोमवार को नरेंद्र मोदी सरकार ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की है. कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि हम कोर्ट के फैसले से सहमत नहीं थे और इसलिए यह पुनर्विचार याचिका दाखिल की है. उन्‍होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार और एनडीए सरकार दलितों के समर्थन में हैं.

विरोध प्रदर्शन से मचा कोहराम-
देश में चल रहे दलितो के इस आंदोलन ने एक व्यापक रूप ले लिया है. देश के बड़े हिस्सों में भारी मात्रा में नुक्सान हो रहा है. देश में तोड़फोड़ व हिंसा का माहौल है. ग्वालियर में एक युवक की हिंसा में मौत होने से मध्य प्रदेश के मुरैना सहित ग्वालियर के कई इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया है. इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ग्रहमंत्री से मुलाकात कर अर्द्धसैनिक टुकड़ी भेजने की मांग की है.

इस आंदोलन ने गाजियाबाद में भी उग्र रूप ले लिया है. गाजियाबाद में एक रेलवे रेलवे ट्रैक को बाधित कर रहे लोगों को पुलिस ने जब हटाने की कोशिश की तो आंदोलनकारियों ने पथराव कर दिया, जिससे कई पुलिसकर्मी घायल हो गए. गुस्साई भीड़ ने पुलिस की बाइक को भी आग के हवाले कर दिया. बाद में भीड़ को हटाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा.

 

मध्यप्रदेश के अलावा बिहार में पंजाब जाने वाली ट्रेन को रोक दिया गया है. बंद के कारण जगह-जगह रेल व सड़क यातायात प्रभावित हैं.
राजस्थान में विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया है. बाड़मेर में दलित और पुलिस में झड़प हो गई है. इस झड़प में 25 लोग घायल हो गए हैं. पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू के गोले दागे.
इसके अलावा उत्तरप्रदेश, पंजाब, झारखंड जैसी जगहो पर भी हिंसा का माहौल है और लगातार प्रदर्शनकारियों का विरोध जारी है.

 

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