स्कूल चलो अभियान की पोल खोलते प्लस्टिक का कचरा ढोते बच्चे

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ललितपुर (ब्यूरो)-  बेसिक शिक्षा विभाग का स्कूल चलो अभियान 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने में नाकाम रहा है। अभियान के दौरान सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ने के बजाय गत वर्ष की तुलना में विद्यार्थियों की अधिक की कमी आई है। अप्रैल के प्रथम सप्ताह में स्कूल चलो अभियान की रैली जोड़ तोड़ से निकली गयी। व खूब प्रचार प्रसार भी किया गया । अधिकारी कर्मचारी फोटो खिंचवाने में भी सबसे आगे नजर आये। पर आज सड़को के किनारे गंदा प्लास्टिक का कचरा बीनते व ढोते हुये बच्चे किसी को नजर नही आ रहे।

स्कूल चली अभियान कार्यक्रम के पंद्रह दिन बाद ही कार्यक्रम फ्लॉप होते हुये नजर आ रहा है। कुछ विद्यालयों की स्थिति तो बिल्कुल खराब है स्कूलों में पहले की अपेक्षा में बहुत कम छात्राकंन नजर आता है। जहां योगी सरकार छोटे – छोटे बच्चो को स्कूल भेजने के लिये लगातार प्रयासरत है व बच्चो के लिये स्कूल बैग, किताबे , जूते मौजे, ड्रेस निशुल्क उपलब्ध करा रही है ।

पर उनके निचले स्तर के कर्मचारी व अधिकारी की उदासीनता के चलते स्कूल चलो अभियान फ्लॉप सा नजर आ रहा है। जहाँ गरीव परिबार के बच्चे प्लास्टिक बीनते नजर आ रहे है इसका क्या अर्थ लगाया जाए या तो आपके द्वारा उन गरीब तबके के परिवारों को जागरूक नही किया गया या उन पर आपके द्वारा निकाली गई रैली व कार्यक्रमो का कोई प्रभाव नही पड़ा। अगर छोटे – छोटे ननिहाल प्लास्टिक का कचरा ढोते या बीनते नजर आ रहे है तो इसके लिए जिम्मेवार कौन है यह बड़ा सवाल है।

रिपोर्ट- जितेन्द्र यादव 

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