भारतीय “कालवारी” पाकिस्तान सहित दुनिया भर की नौ-सेनाओं के लिए है सचमुच काल

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Kalvari_3पूरी तरह से स्वदेश में निर्मित भारतीय नौ-सेना की अत्याधुनिक पनडुब्बी “आईएनएस कालवारी” को समुद्र के भीतर ट्रायल पर उतार दिया गया है I आपको बता दें कि यह पनडुब्बी पूर्णतः स्वदेश में निर्मित है I बहुत ही थोड़ी मात्रा में इस पनडुब्बी को बनाने में फ़्रांस की मदद ली गयी है I इस पनडुब्बी को सितम्बर 2016 तक नौ-सेना के बेडे में शामिल होना तय है I इस पनडुब्बी के निर्माण होते ही भारत अब उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में पहुँच चुका है जो अपने आप से ही अपने देश में पनडुब्बी बनाने की शक्ति रखते है I

भारत की इस पनडुब्बी की सबसे प्रमुख विशेषता यह है कि यह पनडुब्बी पानी के भीतर ही बारूदी सुरंग का निर्माण कर सकता है I इस पनडुब्बी को मुंबई के मझगांव स्थित नेवी के डकयार्ड में बनाया गया है I यह पूर्णतः स्वदेश में निर्मित पनडुब्बी है I इस पनडुब्बी को समुद्र के भीतर सितम्बर 2016 तक ट्रायल पर रखा गया है I अगर इसके परिणाम सेना के अनुरूप पाए जाते है तो इसे सितम्बर 2016 को भारतीय नौ-सेना को सौंप दिया जाएगा I देश के रक्षामंत्री मनोहर परिर्कर ने पश्चिमी नौ-सेना कमांड का दौरा किया और इस पनडुब्बी को भी देखा I

इस पनडुब्बी की लम्बाई 67 मीटर है और इसका वजन 1550 टन है I इस पनडुब्बी के समुद्र में उतरते ही भारत की समुद्री ताकत कई गुना बढ़ गयी है I इस सबमरीन के साथ ही भारतीय नौ-सेना ऐसी ही पांच और नई सबमरीन का निर्माण कर रहा है जिन्हें वर्ष 2020 तक नौ सेना में शामिल होना है I

इस सबमरीन के भीतर एयर इंडिपेंडेंट प्रपल्शन सिस्टम लगा हुआ है I और इसे भारतीय रक्षा मंत्रालय ने फ्रेंच कंपनी डीसीएनएस के साथ मिलकर बनाया है I भारतीय रक्षा मंत्रालय और फ्रेंच कंपनी डीसीएनएस के बीच कुल ऐसी ही छह पनडुब्बीयों का निर्माण करने के लिए 22741 करोंड रूपये का करार किया गया है I

इस पनडुब्बी के भीतर एंटी शिप मिसाइल भी लगायी गयी है और इसके साथ तारपीडो को भी लगाया गया है I इस पनडुब्बी के भीतर चालक दल में 34 लोगों के रहने की पूरी ब्यवस्था दी गयी है I इस सबमरीन के बारे में कहा जाता है कि बेहद ही साइलेंट सबमरीन है जिसकी वजह से इस सबमरीन के बारे में दुश्मन कभी भी पता नहीं लगा सकता है लेकिन यह सबमरीन 90 किलोमीटर तक मार कर सकती है I

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