राजीव गाँधी की हत्या के मामले में सुप्रीमकोर्ट का एतिहासिक फैसला, हत्यारों को रिहा नहीं कर सकती है तमिलनाडु सरकार

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दिल्ली- तमिलनाडु की जे.जयललिता सरकार को आज सुप्रीमकोर्ट से एक बड़ा झटका लगा है I सुप्रीमकोर्ट ने जयललिता सरकार के उस आदेश की धिज्जियाँ उड़ा दी जिसमें जयललिता की तमिलनाडु सरकार ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गाँधी के हत्यारों को माफ़ी देने और जेल से रिहा करने का आदेश दिया था I

आपको बता दें कि आज सुप्रीमकोर्ट ने जयललिता सरकार को झटका देते हुए कहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री के हत्यारों के बारे में निर्णय लेने का हक़ केवल और केवल केंद्र सरकार के ही पास है I राज्य सरकार यदि कुछ भी करना चाहती है तो उसे केंद्र की सरकार के साथ बातचीत करके सहमति प्राप्त करनी होगी I आपको बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गाँधी के 7 हत्यारों को तमिलनाडु की जयललिता सरकार ने मुक्त करने के आदेश दिए थे I जिसके विरोध में केंद्र की मोदी सरकार ने सुप्रीमकोर्ट में अपील दायर की थी I

केंद्र सरकार ने अपनी अपील में सुप्रीमकोर्ट के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि चूंकि इस मामले की पूरी जांच केंद्र की एजेंसी सीबीआई के जरिये की गयी और दोषियों को सजा भी केंद्रीय कानून के तहत ही दी गयी है तो ऐसे उन दोषियों को रिहा करने का या फिर जेल में रखने का अधिकार केवल और केवल केंद्र की सरकार के ही पास होना चाहिए I

आज इसी मामले में सुप्रीमकोर्ट ने अपना फैसला दिया है और तमिलनाडु सरकार को यह साफ़ कर दिया है कि बिना केंद्र सरकार की सलाह के वह अपना कोई भी निर्णय नहीं ले सकती है I दरअसल आपको बता दें कि तमिलनाडु सरकार ने राजीव गांधी हत्याकांड में मौत की सजा से राहत पाने वाले सभी दोषियों संथन, मुरुगन, पेरारीवलन और उम्रकैद की सजा काट रहे नलिनी श्रीहरन, रॉबर्ट पायस, रविचंद्रन और जयकुमार को रिहा करने का आदेश दिया था। इसी मामले में आज देश की सर्वोच्च न्यायालय ने अपना एतिहासिक फैसला सुनाया है I

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