अमेरिका में तेजी से बढ़ रहा सेक्युलरिज्म, सेक्युलरों की दौड़ में आगे निकल रहे ओबामा

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लगता है भारत का सेक्युलरिज़्म वाला रोग अमेरिका को भी बुरी तरह जकड़ चुका है वो भी तब जबकि आतंकवाद और कट्टरपंथ दुनिया में सबसे मजबूत दौर में है। भारत की तरह वहाँ भी सेक्युलर प्रजाति के लोग जनमत का आदर नहीं करते। भारत में ढ़ाई वर्ष गुजर जाने के बाद भी देसी आतंकवादी पार्टियाँ मोदीजी को प्रधानमंत्री मानने को तैयार नहीं। उसी तरह अमेरिका में वहाँ के क़ानून के अनुसार बहुमत पाने के बावजूद वहाँ के लिबरल, सेक्युलर लोग ट्रम्प को आज भी राष्ट्रपति मानने को तैयार नहीं हैं।

वैसे तो लोग कहते हैं कि अमेरिका में वामपंथ नहीं है लेकिन जिस तरह का माहौल ट्रम्प के विरुद्ध बनाया गया है वो वामपंथ की ही परछाई है। ट्रम्प के जीतने के बाद भी वहाँ के सेक्युलर ख़ासकर ओबामा हर दिन ट्रम्प को अमेरिकी मूल्यों, सिद्धान्तों, सेक्यूलर कानून की दुहाई देते रहते हैं और मुसलमानों को देशभक्त सिद्ध करने में लगे हुए हैं। अरे भाई साहब, क्यों नहीं समझते ट्रम्प जैसे भी हैं, जनता ने उन्हें उसी रूप में पसंद किया है। ऐसा नहीं है कि चुनाव जीतने के बाद ट्रम्प ने कठोर भाषा का प्रयोग करना शुरू किया हो। वो पहले से ही ऐसी भाषा बोलते रहे हैं और जनता ने सिर्फ इसी कारण उन्हें बहुमत दिया है। क्या अमेरिका को सेक्युलर बनाये रखने की समस्त जिम्मेदारी अकेले ओबामा की है? आप घर जाइये और अपनी पेंशन लेते रहिये। क्या करोड़ों जनता बेवकूफ है जिन्होंने वोट देकर ट्रम्प को जिताया है? मेरा यहीं सवाल भारत के गद्दार सेक्युलरों, वामपंथियों और आतंक-समर्थकों से भी है।

ब्लॉग – संजय कुमार
(धनबाद ब्यूरो)

नोट : इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचारों को व्यक्त किया है, अखंड भारत न्यूज़ लेखक के विचारों की कोई जिम्मेदारी नहीं लेता है, इस लेख से जुड़े सभी दावों और आपत्ति के लिए लेखक ही उत्तरदायी होगा |

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