चोरी के वाहनों की खुलेआम हो रही बिक्री

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मैनपुरी ब्यूरो : जनपद में खुलेआम बाहरी जनपदों से उड़ाकर लाये जा रहे वाहनों के वैध परिपत्र बनाकर उन्हें ऊची कीमतों पर बेचने बाले गिरोह में कुछ ऐसे नाम चर्चा में आने लगे है। जिन्हे लोग समाज के बीच नया सेवक अथवा प्रतिनिधि मानकर सम्मान कर रहे है। बाहर से आई जांच टीम द्वारा पकड़ी गई एक कार का स्वामी जो स्वयं नोएडा में रहता है। उसके पास भी एक ही नम्बर की दो कारें देख टीम के होश उड़ गये है। पत्रावलियों से पता चल रहा है कि यह दोनों नम्बर दुर्घटना ग्रस्त हो चुकी बाइक के है।

एसटीएफ द्वारा करहल में की गई चोरी के बाहनों की बरामदगी के बाद चोरी करने वाले गिरोह की परते दरपरतें खुलती जा रही है। चोरी की एक कार बरामद होने के बाद उसी नम्बर की दूसरी कार अचानक पुलिस के हाथ लग जाने से जहां टीम पूरी तरह सकते में है। वहीं दोनों कारों के नम्बर करहल थाने में दुर्घटना ग्रस्त होेकर कवाड़े में पड़ी बाइक के बताये जा रहे है। जांच टीम ने जब इस नम्बर की पत्रावली को आरटीओ कार्यालय के कवाड़े से तलाशना शुरू किया तो कई फाइलें बुरी तरह क्षतिग्रस्त पाई गई। इससे यह पता नहीं चल सका कि बाइक किसके नाम है और कार किसके नाम यह तो स्पष्ट हो चुका है कि मैनपुरी जनपद के नव धनाध्य आलाीसान कारें लेकर कहा से आ रहे है। जिनकी कीमत नहीं मकान रखने की वह तीन-तीन कारें दरवाजे पर खड़ी किये है। अधिकारी ने अपना नाम न छापने की शर्त रखकर बताया कि यहां जांच किये गये अधिकांश बाहनों पर पे्रस, एडवोकेट, डांक्टर, ठेकेदार, उत्तर प्रदेश सरकार या किसी राजनैतिक पार्टी के औहदे दार का नाम लिखा होने से आम पुलिस इन बाहनों की सही से पड़ताल नहीं कर पा रही है। जब कोई बड़े आदमी का बाहन चोरी होता है तभी इनकी तलाश की जाती है या अचानक कोई बड़ा गिरोह हाथ लग जाये तो कुछ लोग वेनकाव कर दिये जाते है।

जांच अधिकारियों की तिरछी नजर परिवहन कार्यालय की सबसे कमाऊ सीट पर पड़ जाने के बाद से परिवहन विभाग के दलालों और दबंगों में हड़वडी मची हुई है। तीन दिन से न तो वाहनों के पंजीकरण किये जा रहे है और न ही नई पत्रावली पर कोई ध्यान दिया जा रहा है। पूरे दिन बिजी रहने वाले बड़े बाबू भी हाथ पर हाथ धरे केवल पुराने कार्यो को ही निपटा रहे है। वहीं कुछ लोग कार्यालय में चल रहे तमाम कैमरों को अपने लैपटाॅप पर लोड करने में लगे हुये है।

रिपोर्ट – दीपक शर्मा

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