वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सूर्यनारायण द्विवेदी का निधन

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dr. surya narayan dwivedi

वाराणसी (ब्यूरो)- देश के प्रतिष्ठित साहित्यकार डॉ. सूर्यनारायण द्विवेदी का शनिवार को वाराणसी में निधन हो गया। वे 87 वर्ष के थे। चन्दौली जनपद के अरंगी गाँव निवासी डॉ. द्विवेदी बीएचयू के हिन्दी विभाग में उपाध्यक्ष पद से अवकाश प्राप्त करके वाराणसी के ब्रह्मानंद कालोनी स्थित अपने आवास पर रहते हुए अनवरत साहित्य-साधना में तल्लीन रहे।

डॉ. सूर्यनारायण द्विवेदी कश्मीर के श्री रूपादेवी शारदापीठ व श्रीनगर में हिन्दी एवं संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष भी रहे। इनके द्वारा लिखित समालोचनात्मक ग्रंथ- ‘चमत्कृति सिद्धान्त’, ‘भारतीय साहित्य-शास्त्र में सहृदय परिकल्पना’, ‘भारतीय समीक्षा-सिद्धान्त’, ‘रीतिकालीन काव्य-सिद्धान्त’, ‘सहृदय परिकल्पना एवं आधुनिक हिन्दी साहित्य’ व ‘कश्मीर का शास्त्रीय वाड़्गमय’ काफी चर्चित हैं।

‘आशा शिशु’, ‘आत्रेयी अपाला’ और ‘अंशुमाली’ इनके लोकप्रिय उपन्यास हैं। ‘लीलाशुक’, ‘उपवर्हण’ (नाटक), ‘शतदल’, ‘चेतना की लहरें’ (कविता-संग्रह), ‘शतदल’, ‘स्मृतियों के वातायन से’ (ललित निबंध-संग्रह) सहित ‘श्रीकृष्णकर्णामृतम्’, ‘सौन्दर्यलहरी’, ‘माधवी सुधा’ व ‘रसमंजरी’ इत्यादि अनेक ग्रंथ भी इन्होंने लिखा। हिन्दी के साथ ही डॉ. द्विवेदी को संस्कृत साहित्य की प्राचीन आचार्य परम्परा का पुनर्प्रतिष्ठापक विद्वान भी कहा जाता है। इनको अनेक राष्ट्रीय सम्मान भी प्राप्त हुए थे।
डॉ. द्विवेदी अपने पीछे दो पुत्रों व एक पुत्री का भरा-पूरा परिवार छोड़ गये हैं। डॉ. द्विवेदी के निधन की खबर से चन्दौली के साहित्यकारों में शोक की लहर है।
रिपोर्ट-उमेश दुबे
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