शव लेकर भटके रहे परिजन

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रायबरेली: उत्तर प्रदेश के मुखिया स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लाख प्रयास करते रहे हो पर उनके ही कारिन्दे उनके प्रयासों पर पलीता लगाने  से बाज नहीं आ रहे हैं।

जहां गरीब सरकारी अस्पताल सिर्फ इसलिए आता हेै कि उसके सारे काम आसानी से हो जायगे लेकिन कुछ और ही सच हैं आज हम आप को सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में गरीब व्येक्ति कैसे परेशान होता है|

आइये आपको हकीकत से रूबरू कराते है की पीड़ितों ने अपनी व्यथा मीडिया के सामने कैसे बताई| मामला रायबरेली जिले खीरो थाना छेत्र के सकतपुर गांव का है जहा राजकुमारी 77 वर्ष अपने परिवार के साथ रहती थी परिवार के सभी सदस्य किसी समारोह पर पड़ोस में गए थे कि अचानक दिए गिरने से आग लग गयी| जब तक परिजन घर पहुंचते तब तक व्रद्ध महिला काफी जल चुकी थी किसी तरह उसे जिला अस्पताल में परिजनों ने बर्न वार्ड में भर्ती कराया| जहाँ इलाज के दौरान राजकुमारी की मौत हो गयी| जब डॉक्टरों ने मरीज को पोस्टमार्टम के लिए भेजा तो यहाँ लाते समय तकरीबन 4 बजे डॉक्टर से पोस्टमार्टम के लिए कहा तो कहा की आपने देर कर दी| जबतक डीएम नहीं लिखेंगे तब तक पीएम नहीं होगा|

उसके बाद पीड़ित जिलाधिकारी से मिलकर अपनी पीड़ा सुनाई तो जिलाधिकारी ने फ़ौरन ही स्वस्थ विभाग के अधिकारी को आदेश दिया लेकिन जब पीड़ित वापस चीर घर पंहुचा, तब तक पोस्टमार्टम हाउस में ताला लग चुका था उसके बाद से पीड़ित शव को लेकर रात भर भटकता रहा| जब किसी ने उसकी फरियाद नहीं सुनी तो पीड़ित जिला अस्पताल के एमेजेन्सी पहुंच गया| इस बात की भनक लगते ही किसी तरह पीड़ित को समझा कर वापस चीर घर भेजा गया लेकिन फिर भी उसके परिजन का पोस्टमार्टम नहीं हुआ| मृतक का पुत्र ने अपना दर्द मीडिया को बताई मीडिया की बात सामने आने पर तुरन्त टीम गठित की गई पोस्टमार्टम करने के लिए लेकिन इस घटना से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहाँ ग़रीबो की सुनने वाले कोई नही|

रिपोर्ट- अनुज मौर्य 

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