भगवान् शिव के मंदिर भवरेश्वर से जुड़ा है युगों-युगों का इतिहास

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रायबरेली (ब्यूरो) सावन के महीने में वैसे तो प्रत्येक शिव मन्दिर में भक्तों का सैलाब टूट पड़ता है। परन्तु कुछ मन्दिर ऐसे होते है। जिनके साथ युगों-युगांे का इतिहास जुडा होता है। ऐसे ही एक भीमेश्वर नामक जो अब भवरेश्वर के नाम से विख्यात हैं बछरावाँ थाना क्षेत्र के अन्दर भी स्थित है। वैसे तो द्वापर काल की अनेको स्मृतियां जैसे अहिनिवार, रांती स्थित पाण्डव कूप घटोत्कच का किला आदि विख्यात है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार शकुनी के कपट पांसों के जाल में फस कर अपना सब कुछ गवां चुके पाण्डवों को बनवास के लिए जाना पड़ा था। इस बीच वह बाराबंकी के रामनगर क्षेत्र से घूमते घामते बछरावां के इस कुर्री सुदौली नामक क्षेत्र मंे आये चूंकि कुन्ती बगैर शिव की पूजा किये बिना जल भी ग्रहण नही करती थी। इस बात के गवाह बदो सरायें में स्थित बरोलिया में पारिजात वृक्ष किंतूर मंे स्थित कून्तेश्वर महादेव तथा महादेवा मंे स्थित लोधेश्वर मन्दिर साक्षी है। बछरावाँ के इस क्षेत्र में सई नदी के किनारे विचरण करते हुये पाण्डवों ने यहा डेरा डाला। कुन्ती की नित्य पूजा को सम्पन्न कराने के लिए महाबली भीम अपनी गदा प्रहार से विशाल काय पाषाण खण्ड तोड़ कर लाते थे और उसका अगला सिरा गदा प्रहार से ही शिव ंिलंग के आकार का निर्मित कर जमीन के अन्दर भयानक वेग से गाड़ देते थे। पुनः मंत्रोंच्चार के द्वारा मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करने के बाद कुन्ती उसका पूजन अर्चन करती थी। ऐसे ही एक शिव स्थापना भीम द्वारा इस क्षेत्र मंे की गई थी। उस समय इनका नाम भीमेश्वर विख्यात हुआ। समय के साथ-साथ परिवर्तन आते गये सूबे में मुगलिया सल्तनत कायम हुई महान कट्टर पंथी औरंगजेब शासक हुआ उसने हिन्दू मन्दिरों को तोड़ना शुरू कर दिया उसके कानो में भीमेश्वर की ख्याति भी पहुंची वह अपनी सेना के साथ सुदौली रियासत आ धमका और मजदूरों के द्वारा उसने मूर्ति की खुदाई करवाना शुरू कर दिया। हाहाकार मच गया। मंन्दिर के पुजारी हाथ ऊपर कर शिव भोले से खुद अपनी रक्षा करने की गुहार लगाने लगे बताते हैं कि लगभग 100 फिट खुदाई के बाद भी मूर्ति का कहीं अता-पता नही चला यह जरूर हुआ कि, खुदाई के समय एक मजदूर का फावड़ा मूर्ति के ऊपरी सिरे से टकराया परिणाम स्वरूप ऊपर का थोड़ा सा हिस्सा कटकर अलग जा गिरा। उसमें से रक्त छलकने लगा। इसके बाद भी मुगलिया सल्तनत के उस क्रूर शासक को होश नही आया और उसने शिव लिंग में जंजीरे बंधवाकर हाथियों से मूर्ति खिचवाने का फरमान जारी कर दिया। रायबरेली लखनऊ, व उन्नाव की सीमा पर स्थित इस मन्दिर में सावन के सोमवार कजली तीज व शिवरात्रि को लाखों शिव भक्तों का हुजूम यहां आकर अपने इष्ट की पूजा अर्चना करता हैं। जो भी व्यक्ति यहां श्रद्धा से मुरादे मांगता है उसकी मुरादों को त्रिशूलधारी पूरा करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते है।

रिपोर्ट – राजेश यादव

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