बिना दुकानदार वाली दुकानें, कुछ रामराज्य जैसा

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shop without seller

सोचिये आज के इस समय में अगर कुछ रामराज्य जैसा हो जाये तो मिजोरम के हाईवे पर आपको कुछ ऐसा देखने को मिल सकता है जहाँ पर एक दुकानदार अपने ग्राहकों की ईमानदारी पर विश्वास करके अपनी दुकान चला रहा है

‘Nghah lou dawr’ जिसका मतलब बिना परिचारक वाली दुकान….. जहाँ दुकान के मालिक ने फलों, फूलों और सब्जियों से सजी दूकान को उनकी रेट लिस्ट और पैसे रखने के लिए एक डिब्बे के साथ हाईवे से गुजरने वाले अपने ग्राहकों बिना किसी संरक्षक के लिए खुला छोड़ रखा है, आइजोल से 65 किलोमीटर दूर इस दुकान पर ग्राहक खुद से अपनी ज़रूरत की चीज़ें ले सकता है और रेट लिस्ट के हिसाब से पैसे रखे हुए डिब्बे में डाल देता है, खुले पैसे न होने की सूरत में ग्राहक खुद से ही डिब्बा खोलकर खुले पैसे वापस भी ले सकता है |

इस तरह की दुकान के मालिकों का कहना है “हम पूरे साल जो कुछ भी जंगल से मिलता है इन दुकानों पर बेचते हैं, हम अपने ग्राहकों पर भरोसा करते हैं और वो कभी हमें निराश नहीं करते हैं”

एक ग्राहक कहते हैं “हम अक्सर इन दुकानों से ताजी सब्जियां, फल, और अन्य चीज़ें खरीदते हैं, हमें बहुत अच्छा महसूस होता है और हमें लगता है यह सभी की आदत में शुमार होना चाहिए”

वैसे तो ये दुकानदार कुछ ज्यादा नहीं कमा पाते पर उनके ग्राहकों की सच्चाई और ईमानदारी उन्हें एक अजीब से ख़ुशी देती है |

काश कि मिजोरम की तरह ही हर जगह इतनी सच्चाई और ईमानदारी होती तो हर कोई खुश होता | हमें मिजोरम वासियों से इस तरह की संकृति को अपनाने की प्रेरणा लेनी चाहिए |

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