गंगा मे तैरते हुए कानपुर से प्रतापगढ पहुची नन्ही जलपरी,बेल्हावसियो ने किया जोरदार स्वागत ,क्लीन गंगा का संदेश लेकर पीएम के संसदीय क्षेत्र हुई रवाना

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रियो ओलंपिक में जहां बेटियों ने देश का नाम रोशन किया तो अब कानपुर की बेटी क्लीन गंगा का संदेश लेकर 570 किलोमीटर की दूरी तैरते हुए तय कर रही है। महज 13  साल की श्रद्धा शुक्ला जिसे नन्‍हीं जलपरी के नाम से भी जाना जाता है, एक नया रिकार्ड बनाने के सफर पर कानपुर से चलकर आज प्रतापगढ़ के मानिकपुर घाट पर सही सलामत पहुँच गई। घाट पर पहुचते ही राजकुमारी रत्ना ने फ़ोन कर श्रद्धा शुक्ला को बधाई दिया और प्रोत्साहन स्वरुप कालाकांकर फाउंडेशन की तरफ से ग्यारह हजार का चेक अपनी माँ के हाथो दिलवाया. और आगे मदद करने का भरोसा भी दिया। बाढ़ से उफनती गंगा की लहरों की परवाह किए बगैर जलपरी के नाम से चर्चित श्रद्धा कानपुर से वाराणसी के बीच 570 किलोमीटर की दूरी तैरकर पार करेगी। वह रविवार को मैस्कर घाट से बनारस के जल सफर के लिए रवाना हुई। अपने मजबूत इरादे और गिनीज बुक में अपना नाम दर्ज कराने के लिए श्रद्धा कानपुर के मैस्कर घाट से गंगा में उतरी। जानकारी के अनुसार श्रद्धा हर रोज 100 किलोमीटर तैरेगी। तैराकी के दौरान श्रद्धा 4 जगहों पर रूकेगी। बारिश के कारण उफनाई गंगा में तैराकी कर रही जलपरी को सुरक्षा भी दी गई है। गंगा में दो नावें उसके पीछे चल रही हैं। इसमें चार नाव चालक, छह लाइफ गार्ड और खाने-पीने का सामान है। किसी भी खतरे के समय श्रद्धा को पूरी मदद की जा रही है। । उसके स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए डॉक्‍टरों की टीम भी साथ में है।

FB_IMG_1472617596270श्रद्धा के मुताबिक इस यात्रा का उद्देश्य गंगा को स्वच्छ रखने का संदेश देना है और सन 2020 के रियो ओलम्पिक में गोल्ड मेडल लाने के कड़ी मेहनत लगातार कर रही है। श्रद्धा के पिता ललित कुमार शुक्ला का कहना है कि श्रद्धा का ढ़ाई साल की उम्र से तैराकी से नाता है। उन्होंने बताया कि श्रद्धा के बाबा मुन्नू लाल शुक्ला जब गंगा में नहाने जाते थे तो वे उसको भी अपने साथ ले जाते थे। इसी दौरान श्रद्धा तैराकी में धीरे-धीरे दिलचस्पी लेने लगी और कुछ ही महीनों में एक कुशल तैराक बन गई। इससे पहले, श्रद्धा कानपुर से इलाहाबाद तक की 270 किलोमीटर की दूरी को तैर कर पार कर चुकी है।

द्वारा प्रतापगढ  जिला संवाददाता राजाराम वैश्य

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