तीन तलाक के खिलाफ 1000000 मुस्लिमों ने किए हस्ताक्षर

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नई दिल्ली- मुस्लिम धर्म में व्याप्त तीन तलाक, निकाह हलाला, बहु विवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ जंग दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है आपको बता दें कि तीन तलाक निकाह हलाला बहुविवाह जैसी कुरीतियों से संबंधित मामला अभी भी देश की सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है लेकिन इसी बीच भारतवर्ष में 1000000 से भी ज्यादा मुस्लिमों ने एक याचिका पर हस्ताक्षर कर तीन तलाक जैसी प्रथाओं को खत्म करने की अपील की है यह भी बताते चलते हैं कि यह याचिका दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS से जुड़े एक संगठन मुस्लिम राष्ट्रीय मंच MRF के द्वारा शुरु किया गया था इस याचिका के संबंध में बताया जा रहा है की जिन 1000000 लोगों ने इस याचिका पर हस्ताक्षर किए हैं उनमें बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएं शामिल हैं।

क्या है तीन तलाक, निकाह हलाला और बहुविवाह जैसी कुरीतियां
मुस्लिम धर्म में फैली तीन तलाक जैसी कुरीति के बारे में मुस्लिम धर्मगुरुओं का कहना है कि तीन तलाक के बारे में कुरान में लिखा गया है कि किसी भी व्यक्ति के पास एक बार तलाक कहने के बाद 3 महीने का वक्त उसे मिलता है कि वह इस पर पुनर्विचार करें इस दौरान यदि वह व्यक्ति तलाक के इस शब्द पर पुनर्विचार नहीं करता है और वह दो बार और तलाक बोल देता है तो यह मान लिया जाएगा कि पति और पत्नी के बीच संबंध विच्छेद यानी तलाक हो चुका है।

निकाह हलाला के बारे में बताया जाता है कि निकाह हलाला वह होता है कि जब कोई पति अपनी पत्नी को तीन बार तलाक बोलकर तलाक देकर उसके साथ अपना संबंध विच्छेद कर लेता है तब वह उसी महिला से तब तक पुनर्विवाह नहीं कर सकता है जब तक की वह महिला किसी अन्य व्यक्ति के साथ अपना वैवाहिक संबंध नहीं स्थापित कर लेती है और इसके उपरांत उसका दूसरा पति उसे तलाक नहीं दे देता या फिर उसकी मृत्यु नहीं हो जाती है। अभिप्राय यह है कि यदि कोई व्यक्ति किसी महिला को तीन बार तलाक बोलकर तलाक देता है तो यदि वह उसी महिला के साथ पुनर्विवाह करना चाहे तो पहले उसकी पत्नी को किसी अन्य व्यक्ति के साथ विवाह करना होगा और उस व्यक्ति से भी उसे तलाक लेना होगा तभी वह अपने पहले पति के साथ पुनर्विवाह कर सकती है।

पीएम मोदी ने भी की थी खिलाफत
आपको बता दें कि वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी तीन तलाक का विरोध करते हुए कहा था कि इस कुरीति को तत्काल समाप्त कर देना चाहिए। पीएम मोदी ने कहा था कि यह कुरीति मुस्लिम महिलाओं के जीने के अधिकार को बर्बाद कर रही है समाज में इस तरह की कुरीति के लिए कोई भी स्थान नहीं होना चाहिए साथ ही प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे को राजनैतिक रंग देने और वोट बैंक की राजनीति करने के लिए विपक्ष की कड़ी आलोचना की थी।

सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ करेगी सुनवाई-
उच्चतम न्यायालय की पांच सदस्यीय संविधान पीठ मुस्लिम समाज में प्रचलित कुरीतियों तीन तलाक, निकाह हलाला और बहु विवाह को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई कर इन पर अपना फैसला सुनाएगी आपको बता दें कि संविधान पीठ में सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर न्यायमूर्ति एन बी रमण और न्यायमूर्ति धनंजय वाई चंद्रचूड़ शामिल हैं। उक्त मामले पर अगली सुनवाई 30 मार्च को होनी है। संभावना है कि 30 मार्च को ही संविधान पीठ इन मामलों पर अपना फैसला भी सुना सकती है।

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