कृषि विशेषज्ञ एस. एन. सिंह ने बताये कीड़ों से फसल को बचाने के उपाय

बलिया(ब्यूरो)– फसलों के उत्पादन के मामले में देश में धान का प्रथम स्थान है| इस फसल के कास्ट में रोग व कीट के साथ ही खरपतवार एक बड़ी समस्या होती है| खरपतवार के कारण फसल को काफी क्षति पहुंचती है| खरपतवार की प्रजातियों व मात्रा पर नियंत्रण, कुशल प्रबंधन के बल पर ही संभव है| कृषि विशेषज्ञ एस. एन. सिंह ने बताया कि खरपतवार मिट्टी से पोषक तत्वों का उपयोग कर खेत को कमजोर बना देते हैं| इसी के साथ अनेक तरह के ऐसे कीट हैं जिनका जीवन चक्र खरपतवारों पर ही चलता है| गंधी कीट खेत के मेड़ों पर उगे खरपतवार पर अपना जीवन चक्र चलाता है| जब धान की फसल लग जाती है तो यह गंधी कीट खरपतवार छोड़कर उसके पौधों पर पहुंच क्षति पहुंचाता है| नुकसानदायक खरपतवार के नियंत्रण हेतु उचित प्रबंधन की किसानों को सलाह दिया है|

उन्होंने आगे बताया कि इसके लिए स्वच्छ एवं शुद्ध बीज की नर्सरी डालने आवश्यकता है| इसके लिए सिंचाई के नाली व मेड़ों के खरपतवार को नष्ट करने के लिए ग्लाईफोसेट रसायन के प्रयोग की सलाह दिया है|

रोपितधान में रासायनिक विधि द्वारा नियंत्रण- इसके लिए रोपाई के 2 दिन के अंदर ब्यूटाक्लोर डेढ़ लीटर एनीलोफास 600 मिलीलीटर व प्लेटिलाक्लोर 500 मिली लीटर प्रति एकड़ के प्रयोग का सुझाव दिया है| साथ ही रोपाई के 20 से 30 दिन के अंदर विष्पायरीबैक सोडियम 100 मिलीलीटर प्रति एकड़ तीन या चार पत्ती निकलने पर प्रयोग का सुझाव दिया है| बताया कि पायराजो सल्फ्यूरान सौ ग्राम प्रति एकड़ रोपाई के 10 से 20 दिन के अंदर प्रयोग किया जाना चाहिए।

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