सीता स्वयंवर की कथा सुन भाव विह्वल हुए श्रोता

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रतसर (बलिया)। समीपवर्ती सिकरिया गांव स्थित रतसर -चोगड़ा मार्ग के समीप श्री राम जानकी मन्दिर परिसर में संत स्वामी नारायण सरस्वती महाराज के सानिध्य में आयोजित श्री विष्णु महायज्ञ के सातवें दिन बृहस्पतिवार को गोरक्ष प्रान्त से आयी कथावाचक साध्वी अंजली द्विवेदी ने राम सीता विवाह की कथा का रसपान कराकर श्रोताओं को भक्तिभाव से विभोर कर दिया। संगीतमय कथा में साध्वी ने धनुष यज्ञ एवं सीता स्वयंवर प्रसंग की व्याख्या करते हुए कहा कि विश्व में नारायण के सारंग, भगवान शिव के पिनाक एवं अर्जुन के गांडीव ये तीन धनुष ही प्रसिद्ध है। जनक का संकल्प था कि जो शिव धनुष तोड़ेगा जानकी का विवाह उसी से किया जाएगा, लेकिन दस हजार भूपतियों द्वारा एक साथ ताकत लगाने पर भी धनुष के नही हिलने पर जनक ने राजाओं को इसलिए धिक्कारा क्योंकि राजागण भूमि के स्वामी होते है एवं जानकी पृथ्वी की पुत्री थी इस नाते राजा गण सीता के पिता हुए।

धनुष यज्ञ पूर्व लक्ष्मण जी यह सोचकर मायूस हो गए कि सीता जी से विवाह के बाद श्रीराम से उनकी सेवा छिन जाएगी। स्वयंवर के समय लक्ष्मण के राम के चरणों में झुकने के बाद उन्हें उठाते समय सीता द्वारा राम के गले में जयमाल डाले जाने का उदाहरण देते हुए उन्होंने भाई के प्रति भाई का प्रेम दर्शाया। कथा प्रारंभ होने से पूर्व राम दरबार की भव्य झांकी सजाई गई कथा श्रवण को आयी महिलाओ ने श्रद्धाभाव के साथ सीता विवाह में साड़ी आदि निमन्त्रण के रूप में भेंट किया। 15 फरवरी को मन्दिर में श्री राम जानकी की मुर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी साथ ही 16 फरवरी को भव्य भण्डारे के साथ पूर्णाहुति की जाएगी। यज्ञ को सफल बनाने में पं० प्रकाश मिश्रा और उनके सहयोगी यज्ञाचार्य ने विधि विधान से पूजन आदि का कार्य सम्पन्न कराया।

रिपोर्ट धनेश पांडे

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