शिक्षकों पर एसआइटी की नज़र, दो दर्जन से ज्यादा शिक्षकों पर गिर सकती है गाज

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हरिद्वार(ब्यूरो)- हरिद्वार जिले में शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़े में नौ शिक्षकों की बर्खास्तगी और उन पर संबंधित थानों में मुकदमे के बाद एसआइटी जांच में इसका दायरा बढ़ता ही जा रहा है। फर्जीवाड़े की जद में आए शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच में करीब दो दर्जन और शिक्षकों पर शिकंजा कस सकता है। एसआइटी ने ऐसे शिक्षकों के जाति और आय प्रमाण पत्र जांच कराने के लिए भी पत्र बीईओ को सौंपा है। 2014 में हुए प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती में फर्जीवाड़े का खुलासा 2016 में तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी रामेंद्र कुशवाहा की जांच में सामने आया था। इसके बाद जांच आगे बढ़ी तो कई शिक्षकों को जांच में सहयोग न करने पर उनको निलंबित कर दिया था। बाद में उनके स्थानांतरण के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। अब एसआइटी के हाथ में जांच जाने पर फिर तेजी पकड़ ली है।

एसआइटी ने जैसे-जैसे जांच का दायरा बढ़ाया संदिग्ध शिक्षकों की संख्या बढ़ती चली गई। अब 350 ऐसे शिक्षकों के नाम सामने आए जो फर्जीवाड़े की जद में हैं। एसआइटी टीम के निरीक्षक मणिभूषण श्रीवास्तव पिछले दिनों शिक्षा विभाग के अधिकारियों से जांच के दौरान कागजात लेकर पड़ताल शुरू की तो जांच में संदिग्ध शिक्षकों की संख्या बढ़कर 350 के करीब जा पहुंची। जांच लिस्ट में नाम आने पर ऐसे शिक्षक स्कूल छोड़कर भाग गए हैं, जिनके प्रमाणपत्र फर्जी हैं। जिला शिक्षाधिकारी बेसिक ब्रह़्मपाल सैनी ने खंड शिक्षाधिकारियों के माध्यम से ब्लॉकवार प्राथमिक शिक्षकों को जांच के लिए प्रमाण पत्र देने को नोटिस भेजा है। धीरे धीरे कर 350 में से 338 ने अपने दस्तावेज और बीएड की डिग्री, जाति और निवास प्रमाणपत्र आदि सौंप दिए, जिन 12 शिक्षकों को नोटिस भेजा था।

समाचार पत्रों में भी प्रकाशित कराए नोटिस की अवधि 27 सितंबर बीतने के बाद पिछले महीने की 28 तारीख को विभाग उनकी बर्खास्तगी कर चुका है। हाल के दिनों में एसआइटी की ओर से करीब दो दर्जन और शिक्षकों के दस्तावेज विभाग को भेजकर इनके प्रमाण पत्रों के साथ ही जाति और आय प्रमाणपत्र की भी जांच कराने का निर्देश दिया गया है। जिला शिक्षाधिकारी बेसिक ब्रह्मपाल सिंह सैनी ने बताया कि जांच में एसआइटी की ओर से हाल में आए निर्देशों के क्रम में कई शिक्षकों के जाति, आय आदि के प्रमाणपत्रों की जांच की प्रक्रिया भी गतिमान है। कई शिक्षकों को मामले में बर्खास्त किया जा चुका है, जो सेवानिवृत हो चुके हैं उनके पेंशन आदि देयकों पर रोक लगाकर रिकवरी कराई जा रही है। कई पर प्राथमिकी भी हो चुकी है। जांच एजेंसी को विभाग की ओर से जांच में पूरा सहयोग किया जा रहा है।

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