विधायकगण सियाराम कौशिक, आर के राय और अमित जोगी की प्रेसवार्ता शराबबंदी और आबकारी नीति पर सरकार के विरुद्ध लाया जाएगा “अविश्वास प्रस्ताव”

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रायपुर(ब्यूरो)– सरकार द्वारा स्वयं शराब बेचने के निर्णय के विरुद्ध विधायकगण सियाराम कौशिक, आर के राय एवं अमित जोगी ने मोर्चा खोल दिया है। विधानसभा के आगामी बजट सत्र में सरकार के विरुद्ध “अविश्वास प्रस्ताव” लाया जाएगा। आज तीनों विधायकों ने एक प्रेसवार्ता कर बताया कि अविश्वास प्रस्ताव पर बहुमत जुटाने स्वतंत्र विधायकों सहित दोनों दलों के विधायकों से संपर्क किया जाएगा। आज सभी विधायकों को पत्र भेजे गए तथा फ़ोन एवं मिलकर भी संपर्क किया जाएगा। विधायकों को लिखे पत्र में उनसे अपील की गयी है कि वो दलगत निष्ठा और निति से ऊपर उठकर, अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनें, शराब ग्रसित अपने क्षेत्र के लोगों की पीड़ा को समझते हुए छत्तीसगढ़ आबकारी अध्यादेश 2017 के विरुद्ध अपना मत दें।

अमित जोगी ने कहा कि जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) शराबबंदी लागू करने सदन से सड़क तक लड़ाई लड़ेगी।
पार्टी के एप्प में फीचर जोड़ा जाएगा, टोल फ्री नंबर लांच किया जाएगा, प्रदेश के सभी नगरिय निकायों एवं ग्राम पंचायतों में “गुलाबी टोलियों” का गठन किया जाएगा जो जनजागरण के साथ साथ शराबबंदी लागू करने अभियान छेड़ेगी।

अमित जोगी ने कहा कि हमारे प्रदेश के मुखिया विशव के पहले ऐसे डॉक्टर हैं जो मरीज को दवा नहीं बल्कि दारु देंगे। छत्तीसगढ़ बीमार है। 20 लाख से ज्यादा युवा बेरोजगार हैं, 800 के लगभग किसान आत्महत्या कर चुके हैं, किसान कर्ज से डूबे हैं, महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में 340% से ज्यादा वृद्धि हुई है। शराब से परिवार बर्बाद हो गए हैं । यह बीमार छत्तीसगढ़ जब डॉक्टर के पास इलाज करने की गुहार लगाता है तो प्रदेश के मुखिया उन्हें दवा देने के बजाय दारु देते हैं।

सरकार की कोचियाबंदी पर विधायकों ने कहा कि सरकार द्वारा कोचियाबंदी की बात भी पूरी तरह भ्रामक, बेबुनियाद और हास्यापद है। फर्क केवल इतना है कि पहले अनपढ़ कोचिये थे और अब पढ़े लिखे कोचिये यानि अधिकारी शराब बेचेंगे। सरकार शराब बेचने की ठेकेदारी अपने अधीन यानि सीधा अधिकारीयों के सुपुर्द कर रही है। वो अधिकारी जिनके यहाँ छापे में करोड़ों रुपयों के साथ साथ डॉलर भी निकल रहे हैं। जोगी ने पूछा कि सरकार का यह निर्णय बीमार छत्तीसगढ़ को ठीक करेगा या उसकी जान लेगा?

जोगी ने कहा कि दामाखेड़ा में कबीर पंथाचार्य श्री प्रकाशमुनि साहेब ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी झोली फैलाकर प्रदेश हित में शराबबंदी लागू करने की मांग की थी। लेकिन मुख्यमंत्री साहब ने एक न सुनी उल्टा स्वयं शराब बेचने लगे। यह केवल प्रकाशमुनि साहब का नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ के सभी सामाजिक गुरुओं का अपमान है। गुरु समाज हित में काम करते हैं और यह सरकार शराब बेचकर समाज का अहित कर रही है।

जोगी ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा केरल और तमिलनाडु के तर्ज़ पर छत्तीसगढ़ में शराब बेचने का मॉडल प्रदेश के हित में नहीं है। केरल, तमिलनाडु जैसे राज्यों की जीवन शैली तथा आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था छत्तीसगढ़ से भिन्न है। छत्तीसगढ़ में 60 प्रतिशत से ज्यादा लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन कर रहे हैं। 20 लाख से ज्यादा युवा बेरोजगार घूम रहे हैं, किसान कर्ज में डूबे हैं, ऐसे में सरकार द्वारा शराब जैसे जहर को स्वयं लोगों को पिलाना न केवल अनुचित है बल्कि अमानवीय भी है।

सरकार के निर्णय को विरोधभासी बताते हुए विधायकों ने कहा कि जहाँ एक ओर सरकार ने आंशिक शराबबंदी की बात कही थी वहीँ अब स्वयं शराब बेचने का काम कर रही है । सरकार द्वारा शराबबंदी पर चार हज़ार करोड़ के राजस्व के नुक्सान की बात करना भी बैमानी है। अगर छत्तीसगढ़ में पूर्ण शराब बंदी हो जाए तो चार हज़ार करोड़ का नुक्सान नहीं बल्कि उसका कई गुना फायदा होगा। शराब के कारण जो घरेलु हिंसा, बलात्कार आदि अपराध होते हैं, शराब की लत से जो गरीब परिवारों में छोटी बचत पर असर पड़ता है वो सब बंद हो जाएगा। इसलिए शराबबंदी सरकार के लिए और छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए एक फायदे का निर्णय है। राजस्व नुक्सान की बात केवल सरकार भ्रमित करने के लिए कर रही है।

तीनों विधायकों ने सत्ता पक्ष के विधायकों से अपील करते हुए कहा कि सरकार द्वारा स्वयं शराब बेचने का जहाँ आम जनता विरोध कर रही है वहीँ स्वयं सरकार के मंत्री और विधायक भी दबी जुबान में इसका विरोध कर रहे हैं। हमारे कहना ये है कि भैया, क्यों दबी जुबान में विरोध करते हो, खुलकर विरोध करो। अगर किसी जनविरोधी निर्णय को दलगत निष्ठा से ऊपर उठकर राज्य हित में रोका जा सकता है तो क्यों चुप बैठे हो ? आखिर एक विधायक के लिए उसके क्षेत्र की जनता का हित महत्व रखता है या दल का जनविरोधी आदेश।

रिपोर्ट-हरदीप छाबडा
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