ताश के पत्तों में सिमट रहे नौनिहाल

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प्रतीकात्मक

हाजीपुर (वैशाली) : कम उम्र में जुआ खेलने की प्रवृत्ति नौनिहाल का जीवन अंधकारमय बन रही है ! भविष्य से खिलवाड़ कर रहे इन नौनिहालों की जींदगी ताश के पत्तों के बीच सिमटती जा रही है | इन्हें न भूत का ज्ञान है न वर्तमान की फ़िक्र और न भविष्य की चिंता | जुआ खेलने की बढ़ रही प्रवृत्ति इन्हें अपराध की अँधेर नगरी में धकेल रही है | जुए में बाजी लगाने के लिये नौनिहाल चोरी, छिनौती, पौकेटमारी जैसे संगीन अपराध का सहारा लेकर जुआ खेल रहे हैं |

खुलेआम चौक चौराहों पर, नदी के सूनसान इलाकों, नदी के बीच में खोह में व आम-लिची के बगीचों में नित्त्य दिन जुआरी अपना बाजार लगाते हैं | सबसे बड़ी बात यह है कि यह सब कुछ प्रशासन की जानकारी में फलफूल रहा है | खुद की ज़िंदगी के खिलवाड़ करने वाले चंद बच्चों का झुंड हर दिन जुआ खेलने के लिये नये साथी की तलाश करते फिरता है, और उसे जुए का खेल सिखाता है |

स्कूल में पढने वाले कई छात्र भी कॉपी-कलम की बजाए हांथो में ताश की पतियां लिए हर वक्त यहाँ देखे जा सकते हैं | ये स्कुली बच्चे पैसों के अभाव में किताब- कापी बेच कर जुए का दांव लगाते हैं और अभिवावक सोंचते हैं की उनका लाड्ला पढने गया है | इन स्थलों के पास कुछ खेती करने वाले किसानों की मानें तो ये बच्चे हर दिन देर रात तक जुआ खेलते रहते हैं | पुलिस की नजरो से दूर ये जुआ के अड्डे हर दिन गुलज़ार हो रहे हैं पर पुलिस प्रशासन की नजर इन पर नहीं पड़ रही है |

रिपोर्ट – नसीम रब्बानी

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