सबसे छोटी कविता…

0
1512

ज़िन्दगी पल-पल ढलती है,

जैसे रेत मुट्ठी से फिसलती है…

शिकवे कितने भी हो हर पल,
फिर भी हँसते रहना…

क्योंकि ये ज़िन्दगी जैसी भी है,
बस एक ही बार मिलती है।


????सबसे छोटी कविता…

जिन्दगी एक जंग है,
.
.
.
.
.
जबतक बीवी संग है.????.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here