सपा की अन्तर्कलह कर सकती है चुनाव परिणाम प्रभावित

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mulayam

रायबरेेली। समाजवादी पार्टी की अंतर्कलह कहीं उसे हाशिये पर न खड़ा कर दे। जिले के जमीनी हालात तो कुछ ऐसे ही संकेत दे रहे हैं। संगठनात्मक स्तर पर मजबूत ढाचे में ढल चुकी सपा वर्तमान में बिखरती नजर आ रही है। पार्टी के नये पुराने चेहरो के बीच खिचाव भी स्पष्ट नजर आ रहा है। कुल मिलाकर जिले में समाजवादी पार्टी की राजनैतिक जमीन दरकती नजर आ रही है।

वर्ष 2012 में हुये आम विधान सभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने आशातीत सफलता प्राप्त की थी। कांग्रेस के गढ़ के रूप में जानी जाने वाली रायबरेली जनपद की छह में से पाॅच विधान सभा सीटे सपा की झोली में गई थी। इकलौती सदर विधान सभा सीट निर्दलीय प्रत्याशी अखिलेश सिंह ने जीती थी। भाजपा एवं बसपा यहां दूसरे एवं तीसरे स्थान पर रही थी। अपने इस गढ में कांग्रेस पार्टी कहीं भी मुख्य लडाई में नही रही। लेकिन वर्ष 2017 के इस विधान सभा चुनाव की तस्वीर कुछ अलग ही बनती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एवं पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह के मध्य की रार ने जिले के सपा कार्यकर्ताओं के मध्य भी दरार बना दी है। जो अब स्पष्ट नजर आने लगी है। अभी तक चुनाव आयोग का साइकिल चुनाव चिन्ह पर फैसला न आने के चलते अभी दोनो खेमों में खामोशी तो है लेकिन मत भिन्नता छुपाये नही छुप रही है। किंतु जैसे ही चुनाव चिन्ह पर निर्णय आ जायेगा इस अंदरूनी दरार को खाई में बदलते देर नहीं लगेगी।

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