आलू की फसल में करें दवा का छिड़काव

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रायबरेली : जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि जिन किसान भाईयों ने आलू की फसल में अभी तक फफंूदनाशक दवा का पर्णीय छिड़काव नहीं किया है या जिनकी आलू की फसल में अभी पिछेती झुलसा बीमारी प्रकट नहीं हुई है, उन सभी किसान भाईयों को यह सलाह दी जाती है कि वे मैन्कोजेब युक्त फफंूदनाशक दवा का रोग सुग्राही किस्मों पर 0.2 प्रतिशत की दर से अर्थात् 2.0 किलोग्राम दवा 1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हैक्टेयर छिड़काव तुरन्त करें। साथ ही साथ यह भी सलाह दी जाती है कि जिन खेतों में बीमारी प्रकट हो चुकी हो उनमें किसी भी फफूंदनाशक-साईमोक्सेनिल मैनकोजेब का 3.0 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर (1000 लीटर पानी) की दर से अथवा फेनामिडोन मैन्कोजेब का 3.0 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर (1000 लीटर पानी) की दर से अथवा डाईमेथोमार्फ 1.0 किलोग्राम मैन्कोजेब का 2.0 किलोग्राम (कुल मिश्रण 3.0 किग्रा) प्रति हैक्टेयर (1000 लीटर पानी) की दर से छिड़काव करें। फफूंदनाशक को दस दिन क अन्तराल पर दोहराया जा सकता है, लेकिन बीमारी की तीव्रता के आधार पर इस अन्तराल को घटाया या बढ़ाया जा सकता है। किसान भाईयों को इस बात को भी ध्यान रखना होगा कि एक ही फफंूदनाशक का बार-बार छिड़काव न करें।

रिपोर्ट – राजेश यादव

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