महिला सशक्तीकरण पर डाक टिकट जारी

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The Union Minister for Communications & Information Technology, Shri Ravi Shankar Prasad releasing the Commemorative stamp on “Women Empowerment”, in New Delhi on September 02, 2015.
The Union Minister for Communications & Information Technology, Shri Ravi Shankar Prasad releasing the Commemorative stamp on “Women Empowerment”, in New Delhi on September 02, 2015.

मजबूत अर्थव्यवस्था निर्माण, स्थायित्व और विकास के अंतर्राष्ट्रीय लक्ष्यों को पाने और महिला, पुरुष, परिवार और समुदायों के जीवन में गुणवत्तापूर्ण सुधार के लिए महिलाओं का सशक्त होना अति आवश्यक है ताकि वे सभी क्षेत्रों के अंतर्गत आर्थिक जीवन में पूरी तरह से शामिल हो पाएं। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) भी लैंगिक समानता और महिला सशक्तीकरण पर बल देता है। यूएनडीपी का मानना है कि केवल मानव अधिकारों की वजह से ही लैंगिक समानता और महिला सशक्तीकरण जरूरी नहीं है, बल्कि यह सहस्त्राब्दि विकास लक्ष्यों और सतत विकास को हासिल करने का एक महत्वपूर्ण मार्ग भी है।

लैंगिक समानता भारतीय संविधान की प्रस्तावना, मौलिक अधिकार, मौलिक कर्तव्य और नीति निदेशक सिद्धांतों में समाहित है। संविधान महिलाओं को केवल समानता ही नहीं प्रदान करता बल्कि राज्यों को भी सशक्त करता है ताकि वे महिलाओं के पक्ष में भेदभाव रहित माहौल बनाने के सभी जरूरी उपाय अपनाएं।

लोकतांत्रिक व्यवस्था के ढांचे के अंतर्गत हमारे कानून, विकासात्मक नीतियां, योजनाएं और कार्यक्रमों का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की उन्नति है। महिलाओं के अधिकारों और कानूनी हकों की सुरक्षा के लिए संसद के एक अधिनियम के तहत 1990 में राष्ट्रीय महिला आयोग का गठन किया गया था। भारतीय संविधान के 73वें एवं 74वें संशोधन के माध्यम से नगरपालिकाओं और पंचायत के स्थानीय निकायों में महिलाओं को आरक्षित सीटों की व्यवस्था प्रदान की गई। स्थानीय स्तर पर निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के क्रम में इस पहल ने मजबूत नींव रखी।

जमीनी स्तर पर महिलाओं से जुड़े मुद्दों के बारे में गहरी समझ रखने वाले गैर सरकारी संगठनों और महिलाओं के आंदोलनों ने महिला सशक्तीकरण के प्रति प्रेरणादायक पहल की। बावजूद इसके महिलाओं की वास्तविक स्थिति और उन्हें संविधान, कानून, नीतियों, योजनाओं, कार्यक्रमों आदि के स्तर पर दी गई सुरक्षा के बीच काफी अंतर है।

पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं सहित महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति एक समग्र दृष्टिकोण को अपनाए जाने की आवश्यकता है, जिसके तहत जीवन के सभी स्तरों पर महिलाओं और लड़कियों की जरूरतों पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाए। मानव विकास सूचकांक के संवेदनशील संकेतक शिशु मृत्यु दर और मातृ मृत्यु दर अभी भी चिंता का विषय बने हुए हैं।

महिला सशक्तीकरण विषय पर एक स्मरणीय डाक टिकट का डिजाइन तैयार करने के लिए डाक विभाग ने राष्ट्रव्यापी प्रतियोगिता का आयोजन कर प्रविष्टियां मांगीं थी। प्रविष्टियों के आधार पर चुने गए चार डाक टिकटों के संग्रह और एक लघु चित्र को आज केन्द्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद ने जारी किया।

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