भारतीय एजेंसियों और सरकार की लापरवाहियों का नतीजा था पठानकोट एयरबेस पर हमला – संसदीय समिति

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दिल्ली- पठानकोट हमले के लिए बनायीं गयी संसदीय समिति ने मंगलवार को संसद में अपनी रिपोर्ट सौंप दी है | संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में देश की सुरक्षा ब्यवस्था की जमकर खिंचाई की है | इसी साल बीते 2 जनवरी को हुए पठानकोट एयरबेस पर हमले को समिति ने देश की सुरक्षा एजेंसियों और सरकार की एक बड़ी कमी बताया गया है | इसके अलावा समिति ने पाकिस्तानी जांच दल के भारत आने और इस मामले पर पाकिस्तान की मदद लेने पर भी सवाल खड़े किये है |

सुरक्षा तंत्र की लापरवाही और तालमेल में कमी की वजह से हुआ आतंकी हमला –
संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में साफ़-साफ़ कहा है कि देश की सभी सुरक्षा एजेंसियों, सरकार और पुलिस को देश में होने वाले आतंकी हमले के बारे में पहले से ही सूचन मिल चुकी थी | लेकिन सूचना मिलने के बाद भी सुरक्षा एजेंसिया हमले को रोकने में नाकाम रही है | समिति ने एसपी सलविंदर सिंह के ऊपर भी प्रश्न खड़े किये है और कहा है कि सलविंदर सिंह की भूमिका संदिग्ध है और देश की सुरक्षा एजेंसियों को सलविंदर सिंह एक बार फिर से पूछताछ करनी चाहिए थी जो कि नहीं हुई है |

संसदीय समिति ने गृहमंत्रालय के ऊपर भी प्रश्न खड़े करते हुए कहा है कि भले ही BSF बॉर्डर पर बहुत ज्यादा एक्टिव रहती है और उसने तारों आदि से पूरे बॉर्डर को सुरक्षित कर रखा है लेकिन फिर भी कुछ गिरोह है जो बॉर्डर पर सक्रिय है और ऐसे गिरोहों से निपटने के लिए सरकार ने अब तक क्या किया है | ऐसे गिरोहों को ख़त्म करना होगा |

एयरबेस की सुरक्षा ब्यवस्था भी ठीक नहीं थी इसीलिए हुआ हमला –
संसदीय समिति ने पठानकोट एयर बेस की सुरक्षा ब्यवस्था पर भी प्रश्न चिन्ह लगाया है | समिति ने कहा है कि एयर बेस के चारों तरफ बड़ी-बड़ी जंगली घास है जिसका फायदा आतंकियों ने उठाया है जबकि जवानों को उस इलाके पर नजर रखने में घास की वजह से मुश्किलों का सामना करना पड़ता है | कांग्रेसी नेता पी भट्टाचार्य की अध्यक्षता वाली 31 सदस्यीय समिति ने कहा है कि एयरबेस के भीतर आम जनता के आने जाने पर भी कोई पाबंदी नहीं है जबकि इसे बैन किया जाना चाहिए |

पाकिस्तानी जांच एजेंसी को भारत आने क्यों दिया गया –
बता दें कि समिति ने सबसे बड़ा एक और सवाल पाकिस्तानी ज्वाइंट जांच एजेंसी के भारत आने पर खड़ा किया है | समिति ने तर्क देते हुए कहा है कि यह पहले ही सभी को पता है कि बिना पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसियों और सुरक्षा एजेंसियों के मदद के यह हमला संभव नहीं था लेकिन उसके बावजूद भी पाकिस्तान की ज्वाइंट जांच एजेंसी (JIT) को भारत आने देने का क्या मतलब था |

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