Cmo के कड़े हुए तेवर

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रायबरेली(ब्यूरो)- लालगंज के सरकारी अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्थाओं की पोल प्रभारी मंत्री के निरीक्षण में खुलकर सामने आ गई। अव्यवस्थाओं पर पर्दा डालने वाले महकमे की नींद टूटी और जांच कराकर कार्रवाई की गई।

सीएचसी अधीक्षक डॉ. आरके चौरसिया को सीएमओ आफिस संबद्ध कर दिया गया।
वहीं डॉ. कफील को अस्पताल से हटाकर अंबारा स्वास्थ्य केंद्र से संबद्ध कर दिया गया। लालगंज सीएचसी में बाहर की दवाएं लिखने की शिकायतें कई महीनों से स्थानीय लोग जिला प्रशासन व स्वास्थ्य महकमे से करते आ रहे थे। बावजूद इसके, स्वास्थ विभाग के अधिकारी इस मामले पर कार्रवाई करने के बजाए शिकायतों को पूरी तरह बेबुनियाद बताकर पल्ला झाड़ने तक सीमित रहे।

दो जून को प्रभारी मंत्री नंद गोपाल नंदी ने सीएचसी का निरीक्षण किया था, तो अव्यवस्थाओं की बात सही मिली। उन्होंने अधीक्षक को चिकित्सीय सेवाएं दुरुस्त करने की चेतावनी देकर छोड़ दिया था। प्रभारी मंत्री के तेवर देखने के बाद सीएमओ डा डीके सिंह ने एक जांच टीम लालगंज जांच के लिए भेजी। टीम द्वारा रिपोर्ट मिलने के बाद सीएचसी अधीक्षक को सीएमओ आफिस संबद्ध कर दिया गया।

वहीं डा कफील को बाहर की दवा लिखने के मामले में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने लालगंज से हटाकर अंबारा पश्चिम स्वास्थ्य केंद्र भेज दिया गया।

?लालगंज सीएचसी को लेकर वर्तमान में तैनात सीएमओ द्वारा की गई यह पहली कार्रवाई है। सलोन के जनता हास्पिटल में मरीज की मौत के मामले में सीएमओ ने अब तक जांच नहीं कराई। पूछने पर बताया गया तो दो दिन पहले ही टीम गठित की गई, जबकि ये हास्पिटल पिछले एक माह से विवादों में चल रहा है। ऐसा ही हाल लगभग 80 फीसदी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का है।

लालगंज में किसान नेता रमेश सिंह ने तो प्रभारी मंत्री से स्वास्थ्य विभाग की लापरवाहियों का पूरा ब्योरा पेश कर दिया। बताया की अधिकारियों का जब मन आता है, निरीक्षण करने निकल पड़ते हैं। झोलाछापों के खिलाफ तभी अभियान चलता है, जबकि उनके इलाज से किसी की मौत हो जाती है। सीएमओ डॉ. डीके सिंह ने बताया कि दोषी मिलने पर सीएचसी अधीक्षक पर कार्रवाई की गई है। डा कफील को भी हटा दिया गया है।

रिपोर्ट-अनुज मौर्य

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