संघर्ष गाथा – शहीद महावीर चक्र विजेता कैप्टन अनुज नय्यर के पिता के स्वाभिमान की और प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई के सैनिक प्रेम की

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शहीद कैप्टन के पिता श्री एस.के.नय्यर, बीच में शहीद अनुज नय्यर, और तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई
शहीद कैप्टन के पिता श्री एस.के.नय्यर, बीच में शहीद अनुज नय्यर, और तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई

कहानी कारगिल हाइट्स की –

आज 16 वर्ष बीत चुके हैं भारत और पाकिस्तान के बीच हुए उस युद्ध के, जिसमें पाकिस्तान की नापाक हरकतों की वजह से हमारे देश ने कई बहादुर सैनिकों को खोया था, कई माताओं की गोद सूनी हुई थी, कई सुहागिनों के माथे का सिंदूर उजड़ गया था, कई परिवारों ने अपना एक मात्र सहारा खो दिया था तो कुछ बच्चों के सर से पिता का साया उठ गया था I

लेकिन आज भी बहुत सी ऐसी बातें हैं जिन्हें जानना और समझाना बहुत ही आवश्यक हैं हमारे लिए उन्ही में से एक हैं कारगिल शहीद महावीर चक्र विजेता कैप्टन अनुज नय्यर के माता पिता के संघर्ष की गाथा, भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री की सैनिकों के प्रति समर्पण की भावना की कहानी और देश में ब्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ एक शहीद परिवार के जंग की कहानी –

देश के हर जवान की तरह कैप्टन अनुज नय्यर भी की दिली तम्मना थी की वह भारतीय सेना को ज्वाइन करें और देश के लिए कुछ करें उनके पिता श्री एस.के.नय्यर को इस बात से ख़ुशी थी वह इस बात से बहुत ही अधिक गर्व भी महसूस करते थे लेकिन शहीद कैप्टन की माता जी का मन हर माँ की तरह अपने बेटे को मुसीबत से दूर रखने का था I इन सभी जद्दोजहद के बावजूद अनुज ने भारतीय सेना को ज्वाइन किया और सेना में अफसर बने I

मई 1999 में 17 जाट रेजीमेंट का यह बहादुर बेटा भी कारगिल में ही अपनी बटालियन के साथ दुश्मनों से लोहा लेने के लिए तैनात था, पूरी बटालियन में इस देश के इस बहादुर बेटे के चर्चे हुआ करते थे, कहते दुश्मनों के लिए काल थे अनुज नय्यर I लेकिन दुर्भाग्य से कारगिल में ही देश ने अपने इस बहादुर बेटे को खो दिया I

भारत सरकार के द्वारा पेट्रोल पम्प का दिया जाना –

उस समय के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई की एन.डी.ए. सरकार ने कारगिल युद्ध समाप्ति के बाद देश के सभी शहीदों की याद में उनके परिवार को उन बहादुर बेटों के नाम पर पेट्रोल पम्प दिए, जिससे वह शहीद हमेशा देश के हर कोने में हर एक देशवाशियों के यादों में जीवित रह सके, उसी क्रम में देश के इस शेर के परिवार के पास भी भारत के गृहमंत्रालय से एक पत्र में सूचना दी गयी कि उनके पुत्र महावीर अनुज नय्यर को भी एक पेट्रोल पम्प दिया जा रहा हैं I

प्रारंभ में तो शहीद कैप्टन की माता जी जो कि एक लाइब्रेरियन हैं उन्होंने यह पेट्रोल पम्प लेने से मना कर दिया लेकिन बाद तत्कालीन जनरल वी. पी. मलिक के समझाने पर वह इस बात पर राजी हो गए कि वह पेट्रोल पम्प को स्वीकार कर लेंगे, क्योकि तत्कालीन जनरल वी. पी. मलिक ने उनसे कहा था कि यह पेट्रोल पम्प हम आपको नहीं आपके बेटे को दे रहे हैं, यह बात सुनकर शहीद कैप्टन के माता-पिता इस बात पर राजी हुए थे I

अब शुरू हुआ एक पिता का शहीद महावीर बेटे के हक़ के लिए संघर्ष –

काफी समझाने-बुझाने के बाद जब कैप्टन के माता पिता ने इस बात को स्वीकार कर लिया की ठीक हैं वह अपने बेटे को हमेशा लोगों के लिए जिन्दा रखने के लिए यह पेट्रोल पम्प ले लेंगे तब शहीद कैप्टन के पिता की एक जंग इस देश के जंग लगे हुए सिस्टम से हुई, जहाँ पर हर एक पग पर एक गद्दार बैठा हुआ हैं, हर किसी को अगर कुछ चाहिए तो वह हैं रिश्वत I

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लेकिन एक बहादुर महावीर चक्र विजेता के पिता ने किसी भी प्रकार की रिश्वत देने से साफ़ इनकार करते हुए साफ़ कर दिया कि वह किसी भी ब्यक्ति को एक फूटी कौड़ी भी देने वाले नहीं हैं, इससे रुष्ट होकर सभी अधिकारियों ने उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया, लेकिन डेढ़ साल की अथक मेहनत और परिश्रम के बाद एक पिता को पेट्रोल पम्प के लिए भूमि तो दे दी गयी लेकिन वह भी उनके घर जनकपपुरी से तकरीबन 40-50 किलोमीटर दूर दिल्ली और उत्तरप्रदेश के बॉर्डर पर जहाँ उस समय केवल और केवल जंगल ही जंगल था और कुछ नहीं, जबकि शहीद कैप्टन के पिता ने अपनी उम्र का वास्ता देते हुए यह निवेदन किया था कि अगर हो सके तो पेट्रोल पम्प की जमीन उनके घर के आसपास ही कहीं दी जाय दो अच्छा होगा उनके लिए, लेकिन रिश्वत न देने पर उन्हें उनके घर 40-50 किलो मीटर की दूरी पर जगह दी गयी I

फिर भी कैप्टन के माता-पिता ने हार नहीं मानी और जमीन मिलने के बाद उन्होंने तय किया कि वह अपना घर ही जनक पूरी की बजाय वशुन्धरा इन्क्लेव में ही शिफ्ट कर लेंगे लेकिन अपने बेटे को मिले हुए हक़ को नहीं छोड़ेंगे I

और तब उनके पिता ने दिल्ली पुलिस के आफिसों ने एन.ओ.सी. के चक्कर काटने शरू कर दिए, दिल्ली पुलिस के साथ-साथ दिल्ली नगर निगम, दिल्ली इलेक्ट्रीसिटी बोर्ड आदि आदि लेकिन हर जगह उनसे केवल और केवल एक बात ही कही गयी वह थी रिश्वत दो काम लो, अधिकारियों का यहाँ तक कहना था कि आज के युग में ईमानदार वह हैं जो रिश्वत लेकर काम कर दे I इन सभी मुसीबतों के वक्त में इस शहीद परिवार के साथ केवल और केवल एक ब्यक्ति साथ खड़ा था बूढ़े माँ-बाप का सहारा बन वह थी कैप्टन अनुज की होने वाली पत्नी इनके अलावा कोई भी इस लड़ाई में उनके साथ नहीं था I इसी संघर्ष में सरकारी अधिकारियों ने नीचता की हद तब पार कर दी जब इन लोगों ने इस शहीद के परिवार के ऊपर गुंडों से धमकी दिलवाना और उन्हें नुकशान पहुंचाना प्रारंभ कर दिया I

भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई जी का सैनिक प्रेम –

किसी भी तरफ से रास्ता न देखकर कर महावीर चक्र विजेता शहीद कैप्टन के पिता श्री एस.के. नय्यर ने भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई जी को पत्र लिखा और उनसे मिलने का समय माँगा, यह अच्छा हुआ कि प्रधानमंत्री कार्यालय से उन्हें 5 मिनट का समय दे दिया गया I

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प्रधानमंत्री जी से मिलने पर उन्होंने अपने साथ हुई सभी घटनाओं का वर्णन कर दिया और उन्हें जो कुछ भी उनके साथ अब तक हुआ था वह कह सुनाया और साथ ही उन्हें अब तक जो भी फ़ाइल उन्होंने बनाई थी पूरी की पूरी सौंप दी और निवेदन किया कि अगर उनके पास कभी थोडा भी समय मिले तो वह एक बार इस फ़ाइल को देंखे, शहीद के माता-पिता की दुखभरी दास्तान सुनने के बाद तुरंत ही प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई जी ने उन सभी आरोपी अधिकारियों के खिलाफ शख्त कार्यवाही करने के आदेश दे दिए I

इस पूरे प्रकरण में प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप के बाद 16 दोषी अधिकारियों को तुरंत ही सस्पेंड किया गया और शहीद के माता पिता को तुरंत ही सभी समुचित ब्यवस्था दी गयी I

आज भी दिल्ली के वशुन्धरा इन्क्लेव में खड़ा यह पेट्रोल पम्प एक बहादुर शहीद महावीर चक्र विजेता के पिता के स्वाभिमान की गाथा को बयान करता हैं, इस पेट्रोल पम्प की जितनी भी कमाई होती हैं वह पूरी की पूरी एक ट्रस्ट को जाती हैं जिसके द्वारा गरीब बच्चों की पढ़ाई करवाई जाती हैं I

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