जे. ई. ई. मेन्स एवं अन्य इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में सफल हुए सुदिती ग्लोबल एकेडमी के विद्यार्थी

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मैनपुरी(ब्यूरो)- ‘जिन खोजा तिन पाइयां, गहरे पानी पैठ।’ यह उक्ति चरितार्थ की शहर के विद्यालय सुदिती ग्लोबल एकेडमी, मैनपुरी के छात्र-छात्राओं ने। ज्ञातव्य है कि कक्षा बारहवीं के विद्यार्थी अपने भविष्य को स्वर्णिम बनाने के लिए जे. ई. ई. मेन्स एवं अन्य इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में सम्मिलित होते हैं और उन परीक्षाओं की तैयारी हेतु कोटा, दिल्ली, मथुरा, रुड़की, चेन्नई, कानपुर, शिमला आदि विभिन्न स्थानों पर जाते हैं लेकिन शहर के विद्यालय सुदिती ग्लोबल एकेडमी के छात्र छात्राओं ने विद्यालय में प्राप्त की गई सर्वोच्च शिक्षा पद्धति के अनुसार एवं विद्यालय प्रबन्धन तथा अध्यापकों के कुशल मार्ग निर्देशन में कक्षा बारहवीं की परीक्षा के उपरान्त जे. ई. ई. मेन्स की परीक्षा में प्रतिभाग कर अपना स्थान सुनिश्चित करके यह सिद्ध कर दिया कि हम विद्यालय के कुशल मार्गदर्शन एवं अपने परिश्रम के आधार पर कहीं दूसरी जगह कोचिंग आदि के लिए न जाकर भी सफलता की श्रेणी में अपना नाम दर्ज करा सकते हैं।

विद्यालय के 18 छात्रों ने जे. ई. ई. मेन्स की परीक्षा में सफलता प्राप्त कर अपने जनपद, विद्यालय एवं माता-पिता का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित कराकर एक नई मिशाल कायम की । जे. ई. ई. मेन्स की परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वाले 18 विद्यार्थियों में पार्थ यादव ने 234 अंक प्राप्त कर सफलता में चार चांद लगाए एवं अर्जुन सिंह, शशांक शाक्य, शिवम्, सुशान्त यादव, विकास यादव, यश दुबे, तिष्या शाक्य, विवेकशील शाक्य, शिवा, सार्थक चैहान ने भी अपने माता-पिता, विद्यालय एवं जनपद का नाम रोशन किया, ये ऐसे विद्यार्थी हैं जिन्होंने कहीं अन्यत्र कोचिंग नहीं की बल्कि विद्यालय में ही प्रतिदिन समय से पढ़ने आए एवं अपने गुरुओं के बताए गए निर्देशों का अनुसरण किया। सफलता प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को मिष्ठान्न खिलाकर बधाई देते हुए विद्यालय के वरिष्ठ प्रधानाचार्य डा. राम मोहन ने कहा कि सफलता उन्हीं की चेरी है जो उसे प्राप्त करने के लिए एक कुशल मार्गदर्शक के अनुसार अनवरत कठिन परिश्रम करते हैं एवं माँ सरस्वती का मन्दिर विद्यालय एक ऐसा स्थान है जहाँ से सफलता के सभी द्वार अनायास ही खुलना शुरु हो जाते हैं।

विद्यालय के ये मेधावी छात्र इस बात का स्वयं प्रमाण हैं कि विद्यालय की शैक्षिक प्रणाली वास्तविक रूप से विद्यालय के विद्यार्थियों के भविष्य के अनुकूल है, जो छात्र प्रतिदिन समय से विद्यालय आते हैं और अपने अध्यापक-अध्यापिकाओं द्वारा दिए गए निर्देशन के तहत शिक्षा ग्रहण करते हैं तथा अपने लक्ष्य के प्रति हमेशा कटिबद्ध रहते हैं, उन्हें कहीं भी दूसरे स्थानों पर कोचिंग आदि पढ़ने जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती क्योंकि हम इस पद्धति के अनुसार शिक्षण कार्य कराते हैं ताकि विद्यार्थी कक्षा बारहवीं के बाद होने वाली सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में उच्च अंक प्राप्त करके सफल हो सकें। हमारा उद्देश्य रहता है कि हम छात्रों के सर्वांगीण विकास को दृष्टिगत करते हुए कार्य करें जिससे उन्हें अपने भविष्य के लिए किसी भी कठिनाई का सामना न करना पड़े और वह अपने माता-पिता के सपनों को साकार करें एवं अपने देश की सेवा करते हुए विश्व इतिहास में भारत वर्ष का नाम रोशन करें।

इस अवसर पर विद्यालय की प्रशासनिक प्रधानाचार्य डा. कुसुम मोहन, प्रबन्ध निदेशक लव मोहन, उप प्रधानाचार्य जय शंकर तिवारी, कैम्पस कोआॅर्डीनेटर अल्का दुबे, डा. ओमेश जादौन, राधारमण तिवारी, शशांक दुबे, अक्षय दीक्षित, शिवम् मित्तल, दीपक उपाध्याय, योगेश यादव, चन्द्रेश दीक्षित, ए. पी. साहू, विष्णु सिंह सहित समस्त अध्यापक-अध्यापिकाओं ने भी चयनित विद्यार्थियों को अपनी शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

रिपोर्ट- दीपक मिश्रा 

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