छात्रों से आरसी के जरिए वसूला जायेगा अर्थदंड

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जालौन(ब्यूरो)- राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) उरई के नोडल प्रधानाचार्य एमके सिंह ने करीब चार दर्जन छात्रों को नोटिस देकर आगाह किया है कि वह अध्यारोपित तीन-तीन हजार रुपये के अर्थदंड को 30 जुलाई 2017 तक कक्षानुदेशक के माध्यम से संस्थान में जमा करा दें अन्यथा यह धनराशि बजरिये आरसी तहसील के माध्यम से वसूली जायेगी। दिनांक 4 जुलाई 2017 को पत्रांक- लेखा/क्षतिपूर्ति/वसूली/2017/1081-85 जारी इस नोटिस का दिनांक आज रविवार को समाप्त हो गया है और किसी भी दंडारोपित छात्र द्वारा अर्थदंड जमा किये जाने की सूचना नहीं मिली है।

दी गयी जानकारी के मुताबिक राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान माधौगढ़/कालपी के छात्रों की सेमेस्टर प्रणाली की एससीबीटी प्रायोगिक परीक्षा मई 2017 में आयोजित की गयी थी। इस परीक्षा के दौरान छात्रों ने कथित रूप से संस्थान के फर्नीचर को तोड़ डाला। इस तोड़फोड़ के कथित आरोप को लेकर नोडल प्रधानाचार्य एमके सिंह के स्तर से छात्रों को नोटिस देकर उन्हें अध्यारोपित दंड तीन-तीन हजार रुपये 05 जून 2017 तक संस्थान में जमा करा देने को कहा गया और अन्यथा की स्थिति में दंडात्मक कार्यवाही की चेतावनी दी गयी। किंतु छात्रों द्वारा अर्थदंड जमा नहीं कराया गया। जिस पर उक्त आरसी वाला नोटिस गत शनिवार दिनांक 29 जुलाई 2017 संस्थान के गेट पर चस्पा किया गया और छात्रों को प्राप्त नहीं कराया गया। जिससे चाहते हुये भी तमाम छात्र दी गयी समयावधि पर कथित अपराध का अर्थदंड संस्थान में जमा नहीं कर सके अथवा फिर उन्हें अर्थदंड जमा कराने का समय ही इस नोटिस में नहीं दिया गया।

दंड के अध्यारोपत कालपी एवं माधौगढ़ आईटीआई के छात्रों के मुताबिक उन्होंने परीक्षा दौरान कोई तोड़फोड़ नहीं की तथा परीक्षा भी शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुयी। परीक्षा के दौरान मौजूद रहे प्रशिक्षकगण इसके गवाह है। यदि उन प्रशिक्षकों से प्रधानाचार्य के दबाब से इतर बयान लिये जायें तो सारी सच्चाई सामने आ जायेगी। छात्रों का कहना है कि आईटीआई उरई में जहां उन्होंने प्रायोगिक परीक्षा दी वहां कुर्सियों के अतिरिक्त कोई मेज नहीं थी। कुर्सियांे का दाहिने हत्था ही चैड़ा था जिस रखकर ही वह लिख सकते थे। परीक्षा दौरान ढीला पेंच होने की वजह से सिर्फ एक कुर्सी का यह चैड़ा भाग निकल गया था। जिसे पेंच कसकर सुधारा जा सकता है। कुर्सी के इस प्रकार क्षतिग्रस्त होने पर छात्रों ने प्रधानाचार्य से तीन बार मुलाकात की और कुर्सी ठीक करा देने को कहा। परंतु प्रधानाचार्य ने हर बार छात्र-छात्राओं को भगा दिया गया तथा कहा कि आपको कुछ नहीं करना है, जो करना है वह मैं ही करूंगा।

छात्रों के मुताबिक इस मसले को लेकर नोडल प्रधानाचार्य ने छात्राओं को छोड़कर समस्त 35 छात्रों को रेस्टीकेट कर दिया किंतु किसी भी नोटिस में प्रधानाचार्य ने रेस्टीकेशन का उल्लेख नहीं किया। छात्रों ने अपना नाम उजागर न करने की शर्त पर उक्त जानकारी दी तथा कहा कि वह हल्की-हल्की सी बातों को लेकर अब तक तमाम रुपया बगैर रसीद के प्रधानाचार्य को दे चुके हैं।

कथित रेस्टीकेट और तीन-तीन हजार रुपये के दंड से अध्यारोपित छात्रों ने निदेशक प्रशिक्षण एवं सेवायोजन उप्र लखनऊ, संयुक्त निदेशक झांसी मंडल झांसी, राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान परिसर झांसी, जिलाधिकारी जालौन स्थान उरई से प्रकरण की जांच कराने और निर्दोष छात्रो ंका पक्ष भी सुने जाने की अपेक्षा की है।

रिपोर्ट- अनुराग श्रीवास्तव 

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