जब भारत बना दुनिया का छठा परमाणु ताकत वाला देश, परमाणु कार्यक्रम के सफलता की कहानी

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विज्ञान, राजनीति और साहित्य का जैसा अनूठा संगम हमनें 1998 में देखा वैसा शायद ही अब भारत को कभी देखने को मिले | यह कहानी है दो ऐसे महान नेताओं की जिनमें से एक भारतीय विज्ञान के क्षेत्र का पितामह भीष्म बने तो दुसरे भारतीय राजनीति के | जी हाँ हम आज बात कर रहे है भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई और पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डाक्टर एपीजे अब्दुल कलाम की जोड़ी की | इन दोनों ने भारत को अपने हाथों पैरों पर परमाणु शक्ति संपन्न एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाने में जो भूमिका अदा की है वो शायद ही कोई और कर सकता है |

पोखरण-2 के सफलता की पूरी कहानी –

आज से ठीक 18 साल पहले आज ही के दिन लगभग इतनी ही देर हिन्दुस्तान के प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई दुनिया भर की नजरों में नजरे डालकर यह एलान कर रहे थे कि भारत अब एक परमाणु शक्ति संपन्न देश है, और उसकी तरफ आँख उठाकर देखना किसी भी देश के लिए भारी पड़ सकता है | दरअसल आपको बता दें कि आज ही के दिन यानि 11 मई को भारत के प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई के आदेश पर भारत ने अपना दूसरा सफल परमाणु परिक्षण किया था | इस पूरे परमाणु मिशन का नाम भारत ने ऑपरेशन शक्ति रखा था |
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बता दें कि वर्ष 1998 में जैसे ही पंडित अटल बिहारी वाजपेई सत्ता में आये थे उन्होंने उसके 2 महीने के भीतर ही उन्होंने वैज्ञानिकों को निर्देश दिया कि वे सभी परमाणु परिक्षण की तैयारी कर लें | उन्होंने यह भी कहा था कि यह एक टॉप सीक्रेट प्लान होगा इसलिए इस बात की जानकारी किसी को भी नहीं होनी चाहिए | बता दें कि यह प्लान इतना गंभीर था कि इसके संबंध में केबिनट के भी जयादा तर मंत्रियों को जानकारी नहीं दी गयी थी | प्रधानमंत्री को इस बात का भय था कि अगर कैसे भी करके यह प्लान इस बार फेल हो गया तो भारत को अगला परमाणु परिक्षण करने में कितना वक्त लगेगा इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल होगा |

11 मई से 13 मई तक चला था कार्यक्रम –

वर्ष 1998 में 11 मई से 13 मई के बीच में भारत ने 5 सफल परमाणु परिक्षण किये थे | इस सफलता के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई ने नारा दिया था, जय जवान, जय किसान और जय विज्ञान का | यह दिन भारत की प्रदौगिकी ताकत को दर्शाता है | इसी दिन भारत ने अपनी उन्नत स्वदेशी प्रौद्योगिकी का परिचय देते हुए दुनिया के उन देशो की लिस्ट में शामिल हो गया था जिनके पास उनके अपने परमाणु बम थे | और यह कारनामा हुआ था भारत के पश्चिमी छोर पर स्थित राज्य राजस्थान के जैसलमेर जिले में थार मरुस्थल के बीच में बसी एक जगह जिसे हम पोखरण के नाम से जानते है |

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पोखरण एक प्राचीन विरासत का शहर बताया जाता है | इस शहर के चारों तरफ 5 बड़ी लवणीय चट्टानें है | पोखरण का शाब्दिक अर्थ होता है पांच मृगमरीचीकाओं का स्थान | यह स्थान पहली बार तब सुर्ख़ियों में आया था जब भारत यहाँ पर श्रख्लाबद्ध तरीके से 5 परमाणु परिक्षण कर डाले थे और दुनिया को इसकी कानो कान खबर तक नहीं हुई थी | या फिर इससे पहले इस जगह का नाम तब भी सुर्ख़ियों में आया था जब 18 मई 1974 को तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने यहाँ पर भारत का पहला परमाणु परिक्षण करवाया था | लेकिन उसके बाद अंतर्राष्ट्रीय दबाव के चलते दोबारा कोई सरकार परमाणु परीक्षण की योजना बना ही नहीं सकी |

लेकिन वर्ष 1998 में भारतीय राजनीति ने करवट ली और पहली बार देश की सत्ता एक ऐसे ब्ब्यक्ति के हाथों में गयी जिसे आज भारतीय राजनीति का भीष्म पितामह कहा जाता है | जैसे ही पंडित अटल बिहारी वाजपेई सत्ता में आये उन्होंने 2 महीनों के भीतर ही अपने वैज्ञानिक सलाहकार डाक्टर एपीजे अब्दुल कलाम से परमाणु परिक्षण करने का आदेश दे दिया | बस फिर क्या था डाक्टर कलाम ने इस पूरी कहानी कुछ इस तरह से अंजाम दिया कि जब 11 मई से 13 मई के बीच भारत ताबड़तोड़ 5 परमाणु परिक्षण किये तो पूरी दुनिया बस स्तब्ध देखती ही रह गयी कि आखिर अचानक यह कैसे हो गया |

कैसे दिया गया ऑपरेशन शक्ति को अंजाम-

ऑपरेशन शक्ति की शुरूआत सेब की पेटियां भारतीय वायुसेना के मालवाहन विमान एएन-32 में रखने के साथ हुई थी | एक मई को तड़के तीन बजे मुम्बई के सांताक्रुज हवाई अड्डे से जैसलमेर तक का हवाई सफर और जैसलमेर से पोखरण तक सेना के ट्रकों में सेब की पेटियों के साथ इस यात्रा की कमान मेजर जनरल नटराज (आर. चिदम्बरम) और “मामाजी” (अनिल काकोडकर) के पास थी, लेकिन जैसे ही ट्रकों का कारवां सेब की पेटियां लेकर खेतोलाई गांव में बनाए गए “डीयर पार्क” (परीक्षण नियंत्रण कक्ष) के प्रार्थना हॉल तक पहुंचा, कमान मेजर जनरल पृथ्वी राज (एपीजे अब्दुल कलाम) के हाथ आ गई | दरअसल, आपको बता दें कि लकड़ी के बक्सों में सेब नहीं, बल्कि भाभा ऑटोमिक रिसर्च सेंटर में बनाए गए परमाणु बम थे, जिन्हें बड़ी गोपनीयता के साथ मुम्बई से पोखरण लाया गया था |

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परमाणु परीक्षण के लिए देह झुलसाने वाले गर्मी में महीनों से काम कर रहे कलाम और उनके साथियों ने सारा काम इस गोपनीयता से अंजाम दिया कि किसी को पता नहीं चल सका कि भारत इतना बड़ा धमाका करने वाला है | उन्होंने अल्फा कम्पनी की मदद से पांच गहरे कुए खुदवाए थे | इनके नाम भी अजीब थे | इनमें से दो सौ मीटर गहरे जिस कुएं में हाइड्रोजन बम का परीक्षण किया गया, उसे व्हाइट हाउस का नाम दिया गया था, जबति फिसन बम के कुए को ताजमहल और पहले सबकिलोटन बम वाले कुए को कुम्भकर्ण का नाम दिया गया | बाकी दो कुए एनटी-1 व एनटी-2 दूसरे दिन किए गए परीक्षणों के लिए आरक्षित रखे गए थे |

भारत पहले ही करना चाहता था परमाणु कार्यक्रम –

यूं तो भारत 1995 में ही परमाणु बम का परीक्षण करना चाहता था लेकिन अमेरिका के जासूसी सैटेलाइट ने इस तैयारी को पहले ही पकड़ लिया और भारत को दुनिया के दबाव के सामने झुकना पड़ा | 1996 में जब पहली बाजपेयी सरकार बनी तो परमाणु परीक्षण का राजनीतिक निर्णय तो ले लिया गया लेकिन चुनौती थी अमेरिकी सैटेलाइटों को मात देना | जिम्मा दिया गया एपीजे अब्दुल कलाम को | लेकिन इस दौरान पहली बाजपेयी सरकार गिर गई | उसके बाद 1998 में जब फिर से बाजपेयी की सरकार बनी तो डीआरडीओ प्रमुख कलाम और परमाणु ऊर्जा आयोग के चेयरमैन राजगोपाल चिंदमबरम को हरी झंड़ी दे दी |

इस पूरे कार्यक्रम के दौरान अमेरिका लगातार भारत के हर एक गतिविधि पर नजर रख रहा था क्योंकि अमेरिका को इस बात का शक था कि भारत इस तरह कोई कार्यक्रम पहले से ही कर रहा है ऐसे जब अटलबिहारी वाजेपी सत्ता में है तो भारत के लिए इससे बेहतर मौका और कोई नहीं हो सकता था | अमेरिका ने अपने उपग्रहों को भारत के ऊपर नजर रखने के आदेश दे रखे थे, लेकिन भारतीय वैज्ञानिकों की टीम भी इसके सामने कब घुटने टेकने वाली थी इसके लिए एक बेहतर और सबसे अलग प्लान तैयार किया गया | प्रधानमंत्री के तत्कालीन वैज्ञानिक सलाहकार डाक्टर एपीजे अब्दुल कलाम ने प्लान बनाया कि सभी वैज्ञानिक इंडियन आर्मी की वर्दी में रहेंगे और उनके नाम भी बदले हुए रहेंगे और जितना भी काम होना है वह सब रात में ही होगा दिन में जो चीजें जैसे जहां रहेंगी उन्हें वैसे ही दिन होने से पहले रख दिया जाएगा | और बिलकुल सभी चीजें प्लान के अनुरूप ही हुई | मिसाइल मैन और उनके साथियों ने इस जिम्मेंवारी को बखूबी निभाया | गुप्त तैयारी की बाद जब 11 मई 1998 में एक के बाद एक पांच विस्फोट पोखरण में किए गए तो फिर दुनिया की आंखें फटी की फटी रह गई और आपेरशन शक्ति में एक नहीं पांच बार बुद्धा मुस्कुराए |

इस परीक्षण की सफलता के बाद देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहार वाजपेई ने एक प्रेस कांफ्रेस करके इस बात की जानकारी पूरी दुनिया को दी कि अब भारत एक परमाणु शक्ति संपन्न देश बन गया है | लेकिन पूरी दुनिया के दूसरे मुल्कों में इसकी तीखी प्रतिक्रिया हुई | एकमात्र इजरायल ही ऐसा देश था, जिसने भारत के इस परीक्षण का समर्थन किया | इन परीक्षणों के ठीक 17 दिन बाद पाकिस्तान ने 28 व 30 मई को चगाई-1 व चगाई- 2 के नाम से अपने परमाणु परीक्षण किए | जापान व अमेरिका ने तो एक साथ ही भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लागू कर दिए | संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव पारित कर भारत व पाकिस्तान की निंदा भी की थी |

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