सुप्रीम कोर्ट ने AIPMT 2015 की परीक्षा रद्द करने का आदेश दिया

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Supreme Court सुप्रीम कोर्ट ने 3 मई को हुई AIPMT ( अखिल भारतीय प्री – मेडिकल टेस्ट ) को रद्द करते  हुए चार हफ़्तों के भीतर दोबारा परीक्षा करने के आदेश दिए हैं, अब AIPMT में शामिल होने  वाले 6.30 लाख छात्रों को दोबारा से यह परीक्षा देनी होगी | माननीय सुप्रीम कोर्ट ने यह  फैसला 3 मई को हुई परीक्षा में व्यापक अनियमितताओं को मद्देनज़र रखते हुए लिया है

 पीठ ने कहा अगर एक भी छात्र गलत तरीके से लभान्वित होता है तो यह परीक्षा की गुणवत्ता  को खराब करता है पिछली घटनाओं को ध्यान में रखते हुए CBSE को इन मामलों में संज्ञान  लेना चाहिए था |

CBSE  की तरफ से अदालत में पेश सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने परीक्षा रद्द करने की दलील का विरोध करते हुए कहा था, 6.3 लाख छात्रों को फिर से परीक्षा देने के लिए विवश नहीं किया जा सकता जब गलत तरीकों से केवल 44 छात्रों के अनुचित तरीकों से लाभ प्राप्त करने की बात पायी गई है।

आठ जून को सुप्रीम कोर्ट ने एआईपीएमटी परीक्षा का परिणाम घोषित करने पर 12 जून तक के लिए रोक लगा दी थी। इससे पहले अवकाश पीठ ने हरियाणा पुलिस से ताजा रिपोर्ट पेश करने को कहा, जिसमें इस बात का जिक्र हो कि प्री मेडिकल परीक्षा में कथित अनियमितता का लाभ कितने परीक्षार्थियों को मिला है। पीठ ने पुलिस को कथित लीक का लाभ उठाने वाले अधिक से अधिक छात्रों की पहचान करने को कहा।

सीबीएसई को पांच जून को एआईपीएमटी का परिणाम घोषित करना था, जिसमें छह लाख से अधिक छात्रों ने हिस्सा लिया था। शीर्ष अदालत ने कहा, हम इन बातों से पूरी तरह से अवगत हैं। बड़ा विषय यह है कि परीक्षा की पवित्रता संदेह के घेरे में आ गई है। हम इस बात से पूरी तरह से आश्वस्त होना चाहते हैं कि परीक्षा फिर से लेने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। पीठ ने कहा कि वह कोई भी निर्णय जल्दबाजी में नहीं करना चाहती।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हमें पूरी तरह से आश्वस्त होना होगा। हम किसी कार्रवाई के लिए आलोचना का सामना नहीं करना चाहते। पीठ ने पुलिस को अन्य लाभार्थियों का पता लगाने को कहा। पीठ ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि जांच पूरी हो। यह आगे की कार्रवाई पर निर्णय करने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

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