सुप्रीमकोर्ट ने एक ही झटके में मुलायम और मायावती सहित यूपी के 6 पूर्व मुख्यमंत्रियों के सर से छीन ली छत

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supreme court of india

दिल्ली- उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व 6 मुख्यमंत्रियों के ऊपर से सुप्रीमकोर्ट ने एक झटके में छत छीन ली है | बता दें कि सुप्रीमकोर्ट ने आज एक गैर सरकारी संस्था लोक प्रहरी के द्वारा दायर किये गए केस पर सुनवाई करने के बाद फैसला सुनाते हुए कहा है कि यूपी के पूर्व 6 मुख्यमंत्रियों को 2 महीने के भीतर ही अपने सरकारी आवासों को खाली करना होगा | इस फैसले के साथ सुप्रीमकोर्ट ने यूपी सरकार के उस आदेश को भी खारिज कर दिया है जिसमें यूपी के पूर्व मुख्यमंत्रियों को जीवन भर मुफ्त सरकारी आवास देने की व्यवस्था दी गयी थी |

1997 में यूपी सरकार ने जारी किये थे आदेश –
बता दें कि यूपी सरकार ने वर्ष 1997 में एक सरकारी आदेश जारी करते हुए कहा था कि यूपी के पूर्व मुख्यमंत्रियों को जीवन पर्यंत मुफ्त सरकारी आवास की सुविधा दी जायेगी | यूपी सरकार के इस फरमान के विरोध में एक गैरसरकारी संस्था ने वर्ष 2004 में एक याचिका दायर की थी जिसपर वर्ष 2014 में सुनवाई पूरी कर ली गयी थी और फैसले को सुप्रीमकोर्ट ने अपने पास सुरक्षित कर लिया था | तक़रीबन डेढ़ साल बाद आये इस फैसले में सुप्रीमकोर्ट ने आदेश देते हुए कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को जीवन भर सरकारी आवास की सुविधा नहीं दी जा सकती है |

6 पूर्व मुख्यमंत्रियों पर पड़ेगा असर –
बता दें कि सुप्रीमकोर्ट के इस फैसले के बाद यूपी सरकार के 6 पूर्व मुख्यमंत्रियों के ऊपर असर पड़ने वाला है | इन 6 पूर्व मुख्यमंत्रियों में सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव, बसपा सुप्रीमो मायावती, बीजेपी से कल्याण सिंह, राजनाथ सिंह, कांग्रेस से पूर्व मुख्यमंत्री रामनरेश यादव, और एनडी तिवारी शामिल है | इन सभी नेताओं को 2 महीने के भीतर लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवासों को छोड़ना होगा |

15 दिन के भीतर ही खाली करना होता था सरकारी आवास-
दरअसल आपको बता दें कि यूपी में मंत्रियों को मिलने वाली सुविधाओं और अलाउंस को लेकर एक एक्ट वर्ष 1981 में पास किया गया था | इस एक्ट (उत्तर प्रदेश मिनिस्टर्स सैलरीज़, अलाउंस एंड अदर फैसिलिटीज एक्ट 1981) के अनुसार किसी भी पूर्व मंत्री और मुख्यमंत्री को पद से हटने के 15 दिनों के भीतर ही अपना सरकारी बंगला भी छोड़ना होगा |

लेकिन यूपी सरकार के मुख्यमंत्रियों ने इस कानून की अनदेखी करते हुए खुद को ही बंगला एलाट करना शुरू कर दिया | बाद में वर्ष 1996 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस मामले को चुनौती दी गयी जिसके बाद यूपी सरकार ने वर्ष 1997 में यूपी के पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास की सुविधा जीवन भर मिलती रहे इसके लिए बाकायदा एक आदेश जारी कर दिया | लेकिन आज सुप्रीमकोर्ट ने इसे गैरजरुरी बताते हुए खारिज कर दिया है और कहा है कि सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को 2 महीने के भीतर ही बँगले को खाली करना होगा |

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