कोचिंग वालों सावधान सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा-बने कारगर नीति 

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supreme court of india
पटना : निजी कोचिंग संस्थानों पर एक बार फिर मामला गरम हो गया है, कोचिंग संस्थानों पर अब सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा कदम उठाने को सरकार से कहा है, सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के निजी कोचिंग संस्थानों को कंट्रोल में करने के लिए केंद्र को कारगर नीति बनाने को कहा है, बिहार समेत पूरे देश में कोचिंग की बदतर स्थिति है, न इसमें शिक्षकों की योग्यता का पालन किया जाता है और न ही स्टूडेंट्स की सुविधा का ख्याल रखा जाता है, बस कोचिंग संचालक इसे कमाने का जरिया बना लिया है, संचालकों को रजिस्ट्रेशन से भी मतलब नहीं है, गौरतलब है कि बिहार के शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी ने भी 31 जनवरी तक कोचिंगवालों से रजिस्ट्रेशन कराने को कहा था |

सुप्रीम कोर्ट ने लिया एक्शन

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में कुकुरमुत्ते की तरह फैल रहे निजी कोचिंग संस्थानों पर चिंता जतायी है, कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से निजी कोचिंग संस्थानों के कामकाज पर नियंत्रण करने के उद्देश्य से कारगर नीति लाने को कहा, कोर्ट ने कहा कि देश में निजी कोचिंग संस्थानों की बाढ़ आ गयी है, ऐसा लगता है कि शिक्षा का बिजनेस हो रहा है, जो कहीं से सही नहीं है, न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति यूयू ललित के खंडपीठ ने केंद्र सरकार से कहा कि वह निजी कोचिंग संस्थानों को रेग्यूलेट करने के लिए कोई ठोस व कारगर नीति लेकर आये, कोर्ट ने यह भी कहा कि हम निजी कोचिंग संस्थानों को बंद करने का तो आदेश नहीं दे सकते हैं, लेकिन इन संस्थानों को रेग्यूलेट करना बहुत जरूरी है. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि किसी भी हाल में शिक्षा का व्यवसायीकरण नहीं होना चाहिए |

सबसे पहले बिहार में उठाया गया था कदम

गौरतलब है कि वर्ष 2010 में पटना में कोचिंग इंस्टीट्यूट के कुछ लड़कों ने काफी तोड़फोड़ किया था, उस समय सरकार व प्रशासन की भद्द पिट गयी थी. सरकार पर अंगुलियां उठने लगी, तब बिहार सरकार ने Bihar Coaching Institute (control and regulation) Bill 2010 लाया, इस तरह बिहार पहला स्टेट बना, जब निजी कोचिंग संस्थानों को कानून के दायरे में लाने के लिए सरकारी स्तर पर कदम उठाया गया. निबंधन को अनिवार्य बनाया गया. हालांकि बाद में प्रशासनिक स्तर पर शिथिलता होती गयी और मामला ठंडे बस्ते में चला गया, इसके रजिस्ट्रेशन की डेडलाइन खत्म होने के बाद भी वैसे संस्थानों पर कार्रवाई नहीं की गयी |

क्या है नियम, क्या है हकीकत

एक्ट के अनुसार सभी कोचिंग में वहां पढ़ाने वालों की योग्यता और उनके अनुभव को लिखा जाना जरूरी है. कोचिंग में पाठ्यक्रम संबंधित सभी जानकारी स्पष्ट होनी चाहिए. पाठ्यक्रम के लिए तय समय सीमा की जानकारी भी छात्रों को दी जाये, फीस सहित अन्य जानकारियां प्रोस्पेक्टस में स्पष्ट रहे, कोचिंग संस्थान में छात्रों के लिए पेयजल और टॉयलेट की व्यवस्था अनिवार्य रूप से रहे, संस्थान में पार्किंग, अग्निशमन और आकस्मिक चिकित्सा की सुविधा भी रहे, तीन साल पर रजिस्ट्रेशन भी कराना है. लेकिन, हकीकत यह है कि किसी भी संस्थान में इसका पालन नहीं हो रहा है, पटना ही नहीं, पूरे बिहार की यही स्थिति है, जबकि नियम उल्लंघन करनेवालों पर जुर्माना का भी प्रावधान है. पहली बार 25 हजार, जबकि दूसरी बार एक लाख रुपये दंड का प्रावधान है. तीसरी बार में रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है. और तो और, बिहार में कम से कम 10 हजार कोचिंग संस्थान होंगे, पर रजिस्टर्ड सैकड़ों में हैं |

पिछले माह शिक्षा मंत्री ने भी दी है चेतावनी 

बिहार में कोचिंग संस्थानों पर नकेल कसने को लेकर शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी ने दिसंबर में चेतावनी दी है, उन्होंने कहा कि निजी कोचिंग संस्थान या निजी शिक्षण संस्थान संचालक 31 जनवरी, 2017 तक हर हाल में रजिस्ट्रेशन करा लें, बिना रजिस्ट्रेशन कोई भी कोचिंग संस्थानों का संचालन नहीं हो सकेगा, हालांकि डेडलाइन के बीते चार दिन हो गये हैं, लेकिन स्थिति जस की तस है. ऐसे में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के सुनाया गया डिसीजन एक बार फिर निजी कोचिंग संस्थानों के लिए चेतावनी बन कर आया है |

रिपोर्ट – आशुतोष कुमार

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