शक के घेरे में भाकपा (माओवादी) विस्फोट मामला …??

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चतरा/टंडवा- कोल प्रोजेक्ट आम्रपाली में नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) का हमला शक के घेरे में है| जो वस्तुस्थिति दिख रही है, उसके मुताबिक हमले के पश्चात माओवादी कभी भी बिना लेटर पैड के पर्चा जारी नहीं करते| आम्रपाली घटना में पहली बार सादा कागज पर नारा लिख कर पर्चा छोड़ा जाना शक पैदा कर रहा है|

सूत्रों की माने तो टंडवा कोल परियोजना पर एकमात्र नक्सली संगठन टीपीसी का एकक्षत्र साम्राज्य रहा है| इस परियोजना को नक्सली राज से मुक्त करवाने के लिए राज्य सरकार के द्वारा नक्सली संगठन टीपीसी समेत अन्य संगठनो पर पुलिसिया कार्रवाई काफी तेज गति से हो रही है| मुख्यालय के वरीय पुलिस अधिकारियो की माने तो नोटबन्दी के बाद से लगातार की जा रही कार्रवाइयों से खासकर टीपीसी को ही ज्यादा नुकसान हुआ है|

सत्ताशीन सरकार के बिरोधी दल हमेशा ही टीपीसी संगठन को सरकारी नक्सली संगठन होने का आरोप लगाते रहें है| पहले तो टीपीसी को सिर्फ नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) से लड़ाई लड़नी पड़ रही थी | पर अब तो सरकार भी इनके खिलाफ खड़ी है| वर्तमान समय में अपने आधार इलाके में भी दोराहे पर खड़ी टीपीसी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ने को विवस है|

इसलिए इस संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि राज्य सरकार का ध्यान भटकाने के लिए इस प्रकार की कार्रवाई को अंजाम दिया गया हो| ताकि सरकार द्वारा टीपीसी पर की जा रही कड़ी कार्रवाई पर पुर्नविचार हो| चूँकि इसमें भी दो राय नहीं कि टीपीसी के अस्तित्व में आने के बाद सबसे अधिक नुकसान भाकपा(माओवादियों) को हुआ है|

गौरतलब है कि टीपीसी के अस्तित्त्व में आने के बाद झारखंड के आधे से ज्यादा इलाको से माओवादियों का नामोनिशान मिट गया | संयुक्त बिहार में माओवादियों की कथित राजधानी के नाम से कुख्यात चतरा जिले में टीपीसी ने एकक्षत्र साम्राज्य स्थापित कर लिया है | अन्य नक्सली संगठन छोटे-छोटे ग्रुप में बंटकर अपनी दाल रोटी चलाते हैं | बहरहाल इस घटना पर पुलिस किस दिशा में जाँच आगे बढ़ाती है, यह देखने की बात होगी ?
रिपोर्ट- संजय कुमार
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