सफारी गाड़ी के अंदर जलाकर मार डाले गये पांच नौजवानों के कातिलों को बचाने की कोशिश कर रहे स्वामी प्रसाद मौर्या : देवेश शुक्ला

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रायबरेली (ब्यूरो) सफारी गाड़ी के अंदर निर्दयता पूर्वक आग में भूनकर मार डाले गये पांच नौजवानों के हृदय विदारक मामले में पुलिस पल-पल पर अपना स्टैण्ड बदल रही है। पुलिस की इस लचर कार्यशैली के पीछे सरकार के मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या के उपर मृतक रोहित शुक्ला के भाई तथा मामले में एफआईआर दर्ज कराने वाले देवेश शुक्ला ने आरोप लगाये हैं। देवेश का कहना है कि स्वामी प्रसाद के निर्देशों के तहत पुलिस मामले में आरोपियों के उपर मेहरबान है और मामले की वीभत्सता को कम करके दुर्घटना का रूप देना चाह रही है। स्वामी प्रसाद मौर्य ने इस हत्या कांड को अपने एक बयान में पुलिस जांच पूरी हुये बिना ही दुर्घटना करार दे दिया है।

इस आरोप को पुष्ट करने के लिये कुछ फोटो ग्राफ मीडिया में जारी किये गये हैं। जिनमें मुख्य आरोपी कृष्ण कुमार स्वामी प्रसाद के साथ दिखाई दे रहा है। एक अन्य आरोपी शिवकुमार जो कि पूर्व ब्लाक प्रमुख है के साथ कृष्ण कुमार की निकटता जाहिर करता दूसरा फोटो ग्राफ भी प्रकाश में आया है। इतना ही नहीं एक अन्य फोटो ग्राफ में क्षेत्रीय सीओ कृष्ण कुमार और शिवकुमार के साथ बेहद आत्मीय वातारण में विचार विमर्श करते हुये दिखाई दे रहे हैं। यह सारे फोटो ग्राफ स्पष्ट कर रहे है कि आरोपियों का मंत्री, पुलिस और आपस में गहरा तालमेल है।

सूत्रों का कहना है कि जिस प्रकार शुरूआती दौर मंे पुलिस ने इसे बिजली के खम्भे से टकराकर शार्ट सर्किट से आग में जलना तथा मृतकों को कृष्ण कुमार की हत्या के इरादे से बताया था वह एक सोची समझी साजिश थी। जिसके पीछे मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य का समर्थन था। परंतु मौके पर उपलब्ध साक्ष्य के अनुसार जो असलियत दिखाई पड़ी, मीडिया ने उसे सामने लाकर रख दिया तो पुलिस इन तथ्यों को झुठला नहीं सकी। मगर मामले की असलियत खुलते देखकर स्वामी प्रसाद मौर्य ने मंत्री होते हुये भी ऐसा बयान दे दिया। जिससे सभी हैरत में आ गये। बिना पुलिस की जांच हुये सरकार के जिम्मेदार मंत्री ने घोषित कर दिया कि यह एक दुर्घटना थी और मारे गये लोग अपराधी थे। जबकि सच्चाई यह है कि पांच मृतकों में सिर्फ एक रोहित शुक्ला के उपर कुछ साधारण धाराओं में थाना संग्रामगढ़ जिला प्रतापगढ़ में मुकदमें पंजीकृत है। शेष अन्य चारों का पुलिस कोई भी अपराध साबित नहीं कर पाई है। इतना ही नहीं मृतकों के पास से कोई भी असलहा भी बरामद नहीं हुआ था। आरोपी पक्ष का एक भी व्यक्ति मामूली रूप से भी घायल नहीं हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी जाहिर है कि आरोपियों द्वारा ही मृतकों के उपर गोली चलाई गयी। बिजली का खम्भा सफारी की टक्कर से नहीं टूटा बल्कि किसी अन्य प्रकार से उसे तोड़ा गया। बिजली की लाइन में पनकी कंट्रोल से ही बिजली आपूर्ति बंद थी। इस सारे तथ्यों के बाद भी मंत्री का बयान शायद पुलिस को यह इशारा है कि इसी लाइन पर जांच करनी है और आरोपियों को बचाना है। मौजूदा भाजपा सरकार के राज्य में लचर कानून व्यवस्था के पीछे शायद सत्ता शीर्ष से जारी होते ऐसे ही निर्देश हैं जो अपराधियों के मनोबल को बढ़ा रहे हैं।

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