अगर आप हैं परेशान स्वप्नदोष के कारण तो पढ़ें इसे

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diabetes_and_sex_problemsस्वप्न दोष जैसा कि इसके नाम से भी प्रकट होता है कि यह बह लक्षण है जिसमें सोते हुये स्वपन देखते-2 पुरुष का वीर्य स्खलित हो जाता है।
महर्षि चरक के अनुसार –

स्वपनं मनसः कामासक्तत्वात् शुक्र स्रावमयो दोषाख्यः रोगोरव्यो यः सो हिं स्वपनदोषो भवति।।

अर्थात – “स्वपन देखते समय मन के कामासक्त हो जाने पर वीर्य का स्राव हो जाना ही स्वपन दोष नामक व्याधि है।”
आयुर्वेदज्ञों ने स्वपन दोष के अनेकों कारण बतलाऐ हैं। सबसे प्रमुख कारण जो बतलाया गया है वह है स्त्री चिन्तन और भोग लालसा की अधिकता का होना। अतः इस रोग की समाप्ति के लिए मन की सुचिता सवसे प्रमुख दवा है। इस रोग के अन्य कारणों में है हस्त मैथुन, गुदा मैथुन, और कौष्ठबद्धता (कब्ज),दूषित विचार, अजीर्ण तथा गुदा कृमि की उपस्थिति आदि बहुत से कारण हो सकते हैं।वैसे यह रोग प्रमेह के अन्तर्गत ही आता है इसे स्वपन मेह भी कहा जाता है।और खास बात यह भी है कि प्रमेह चिकित्सा के ज्यादातर योग स्वपन दोष का सार्थक इलाज करते हैं।

इसका उपचार – चरक संहिता के अनुसार

वंश लोचन और सत गिलोय 20-20 गरमा, वंग भष्म, प्रवाल भष्म और मुक्ताशुक्ति भष्म 1-1 ग्राम लेकर खरल में अत्यंत महीन करके रख लें

मात्रा – 500मिली ग्राम तक शहद से प्रातः शाय सेबन करने से स्वपन दोष में उष्णता के कारण शु्क्रक्षय ,मूत्र की गड़वड़ी आदि विकार दूर हो जाते हैं।

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