स्वराज अभियान की जांच टीम ने किया गांवों का दौरा, जारी की जांच रिपोर्ट

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चंदौली/नौगढ़ (ब्यूरो) प्रदेश की योगी सरकार के निर्देश पर वनाश्रितों को जमीन से उजाड़ने की कार्यवाही नौगढ़ की शांति के लिए खतरा पैदा कर देगी। पहले भी राजनाथ सिंह के नेतृत्व में बनी प्रदेश सरकार की नीतियों और कार्यवाहियों ने नौगढ़ में अशांति पैदा की थी। जिसके खिलाफ अखिलेन्द्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में चले लोकतांत्रिक आंदोलन ने यहां शांति की बहाली की थी जिसे फिर से योगी राज में भंग किया जा रहा है। हाईकोर्ट के आदेश और वनाधिकार कानून के प्रावधान कि बिना दावा निस्तारण के किसी को भी उसकी पुश्तैनी जमीन से बेदखल नहीं किया जायेगा के बावजूद दावों की सत्यापन और मान्यता प्रक्रिया के बिना ही आदिवासियों और वनाश्रितों को जबरन जमीन से बेदखल किया जा रहा है। नौगढ़ की शांति की रक्षा, वनाधिकार कानून को लागू कराने और गैरकानूनी बेदखली पर रोक लगाने के सवालों पर 28 जून को तहसील पर होगा जनसुनबाई यह बातें आज भरदुआ, तेन्दू, मझगंवा, बोदलपुर, गोलाबाद, मनोवर, परसिया में आयोजित सभाओं में स्वराज अभियान की प्रदेश कार्यसमिति सदस्य व यू0 पी0 वर्कर्स फ्रंट के प्रदेश अध्यक्ष दिनकर कपूर ने कहीं।

दिनकर कपूर के नेतृत्व में गयी स्वराज अभियान की जांच टीम ने ग्रामीणों से बेदखली की कार्यवाही के बारे में भी जानकारी एकत्र की। जांच टीम में स्वराज अभियान के चंदौली के नेता अजय राय, ग्रामीण मजदूर मंच के संयोजक राम नारायण, सह संयोजक रामेश्वर प्रसाद, राम सकल, रमेश सिंह खरवार, हेमनाथ, लाल बहादुर, विनोद कुमार शामिल रहे। टीम को ग्राम गोलाबाद में ग्रामीणों नेर बताया कि वन विभाग, पुलिस और प्रशासन की टीम ने 36 लोंगो को पुश्तैनी जमीन से बेदखल किया है। इन जमीनों पर ग्रामीणों के कच्चे मकान, ओसारा व कुएं बने हुए थे और इन पर वह खेती कर रहे थे। इन जमीनों पर ज्यादातर ने वनाधिकार में दावा भी तहसील में जमा किया हुआ था। इसी प्रकार बोदलपुर में खेती की जमीन से ग्रामीणों को बेदखल कर टेंªच और गढ्ढ़े बना दिए गए है जबकि बगल की ही खाली पड़ी वन भूमि परती पड़ी हुई है। तेदुआं और मझगांवा में लोगों ने बताया कि वन विभाग द्वारा उन्हें जमीन खाली करने की नोटिसें दी जा रही है। जांच टीम ने उपजिलाधिकारी से भी बातकर उन्हें कानूनी स्थिति से अवगत कराया। जांच टीम ने यह भी देखा कि जंगल की सैकड़ों एकड़ जमीन पर भूमफियाओं ने कब्जा कर रखा है पर उन्हें वन विभाग बेदखल नहीं कर रहा है। नौगढ़ दौरे की रिपोर्ट महामहिम राज्यपाल और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भेज कर उनसे उ. प्र. सरकार को विधि के अनुरूप कार्यवाही करने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया जायेगा साथ ही उच्च न्यायालय इलाहाबाद में अवमानना याचिका दाखिल की जायेगी।

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