स्वराज अभियान कर रहा है सूखा का फौरी ज़मीनी सर्वे और आकलन

0
265
प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली- तमिलनाडु में किसान अधिकार यात्रा के दूसरे दिन की शुरुआत तंजावुर जिले के कानंदगुड़ी से हुई और यात्रा का दूसरा पड़ाव अलनगुड़ी में हुआ। योगेंद्र यादव ने यहां किसानों को संबोधित किया और उनकी परेशानियों को जाना। स्वराज अभियान और यूथ फ़ॉर स्वराज के प्रतिनिधियों ने ग्रामीण किसानों से सूखे से संबंधित समस्याओं के बारे में बात की और सूखे के प्रभाव का आकलन किया।

कानंदकुड़ी के किसानों का कहना था कि उनके यहाँ फसलों को 100 प्रतिशत तक कि क्षति हुई है। फसल की क्षति इस हद तक हुई है कि उसका उपयोग किसान चारे के रूप में भी नही कर पा रहे हैं। हालांकि अलनगुड़ी में कानंदकुड़ी से हालात बेहतर है लेकिन समस्या वहां भी जटिल रूप में व्याप्त  है। यहाँ भी 40 से 50 प्रतिशत फसल का नुकसान हुआ है।

जिन किसानों के पास बोरवेल का प्रबंध है वो तो दो फसल पैदा कर पाते हैं। लेकिन जिन किसानों को वर्षा और कावेरी के पानी पर निर्भर रहना पड़ता है वो किसान मुश्किल से एक फसल पैदा कर पाते हैं। कानंदकुड़ी में किसानों को चारे के अभाव में पशुओं को बेचने पे मजबूर होना पड़ रहा है जबकि अलनकुड़ी के किसान 50 रुपया प्रति पशु चारा खरीद रहे हैं। जो किसान पशुओं को बेचने के लिए मजबूर हैं वो उसकी पर्याप्त कीमत नहीं पा रहे हैं। जहां पहले अमूमन एक पशु 45000 का बिकता था वहीं अब उसकी कीमत मात्र 10000 रह गयी है।

फसल बीमा योजना का प्रीमियमम तो किसानों ने भर दिया है लेकिन उन्हें क्षतिपूर्ति का क्लेम अभी तक नही मिल पाया है। कानंदगुड़ी में  किसानों का कहना है कि सरकारी बैंकों से जरूरत के मुताबिक लोन न मिल पाने पर  वो साहूकारों से उच्च ब्याज दर पे लोन लेने को मजबूर हैं। सूखे से प्रभावित किसानों ने KCC या अन्य योजनाओं से जो भी लोन लिया है उसे भरने के लिए किसानों को लगातार नोटिस जारी किया जा रहा है।

स्वराज अभियान की टीम एस सेल्वराज के परिवार से मिली। सेल्वराज ने चीनी मिल से भुगतान न हो पाने की वजह से ऋण की बोझ के कारण आत्महत्या कर ली थी। यात्रा के दौरान स्वराज अभियान एक ऐसे गाँव पहुँचा जहाँ एक भी हैंडपम्प नहीं है। यह एक नेदार नाम का दलित गाँव है। स्वराज अभियान ने तुरंत मुख्य सचिव को एक अर्ज़ी लिखी कि यहाँ हैंडपम्प कि व्यवस्था की जाए। इस अर्ज़ी को तुरंत गाँव के लोगों की ओर से मुख्य सचिव तक पहुँचाया जाएगा।

इलाकुरची गाँव में तमिल नाडु विवसायिगल संगम (किसान संघ) ने एक जन सभा आयोजित की। जहाँ 100 से अधिक किसानों ने अपनी समस्याएँ साझा की और सर्वेक्षण में भाग लिया। दूसरे दिन किसान अधिकार यात्रा ने लगभग 150 कि मी का सफ़र तय किया।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY