त्योहारों के मद्देनजर मिलावटी खोये से बनी मिठाईयों की बाजार में भरमार

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महराजगंज/रायबरेली (ब्यूरो) त्योहार के मद्देनजर महराजगंज कस्बा सहित ग्रामीण क्षेत्रों में सजने लगी है मिलावटी मिठाइयों की दुकाने मिलावटखोरो की रहती है चांदी कहते हैं सेहत खुदा की सबसे बड़ी नियामत है लेकिन त्योहार का मौसम आने के साथ ही सेहत के साथ खिलवाड़ भी शुरू हो जाता है। दरअसल त्योहार के मौसम में मिलावट करने वालों का धंधा चरम पर पहुंच जाता है। इस दौरान प्रशासन की ओर से छापेमारी में लाखो का मिलावटी खाद्य पदार्थ पकड़ा भी जाता है मगर कुछ को लेनदेन के बाद छोड़ भी दिया जाता है मामला निपट जाता है जिससे मिठाइयां बेचने वालो का होंसला बुलंद रहता है खरीदते समय हर किसी के मन में संदेह बना ही रहता है और यह मिलावट त्योहारों की मिठास को फीका कर देती है खोया व मिठाइयां और अन्य खाने की चीजों में होने वाली यह मिलावट आसानी से पकड़ में नहीं आती है। जिस मिठाई के डिब्बे को लेकर आप परिजनों और संबंधियों के बीच खुशियां बांटने जा रहे हैं तो सावधान हो जाएं क्योंकि इन मिठाइयों के खाने से आपके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ना लाजिमी है।

चाहे दूध हो या फिर दूध से निर्मित अन्य उत्पाद सरसों का तेल बेसन सब में मिलावट है रक्षाबंधन का त्यौहार हो या अन्य त्योहारों पर मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे मौके पर मिलावटखोर खूब भुनाते हैं। खासकर दूध निर्मित मिठाइयों में तो जमकर मिलावट की जाती है। सरकारी अमला भी तीज त्योहारों पर मिलावटखोरी के खिलाफ मुहिम चलाता है। मगर ज्यादा कुछ सफलता नही मिलती  मे जानता हु मिठाइयों के बगैर त्योहार की कल्पना भी नहीं की जा सकती है ऑफिस हो या घर हर जगह लोग एक दुसरे का मुहँ मीठा मिठाइयों से ही करतें हैं। दूध को जला कर बनाये गए स्वादिष्ट खोये के बिना मिठाइयों की कल्पना करना भी संभव नहीं है लेकिन क्या होगा अगर ये नकली हो ? रक्षाबंधन में हजारों किलो मिठाई की खपत होती है और इसका फायदा कुछ आपराधिक व्यापारी खूब उठाते हैं और नकली खोया और घी बाजार में उतार देतें हैं खोया के काले कारोबारियों के लिए नकली दूध से नकली खोया बनाना बेहद आसान है। नकली खोया बनाने के लिए सबसे पहले ये बनाते हैं नकली दूध। पहले ये लोग कुछ हिस्सा असली दूध का लेते है। फिर उसमें कास्टिक सोडा, यूरिया, रिफाइंड आयल मिलाकर उबालतें हैं । दूध में मलाई आ जाए इसके लिए आरारोट भी डाला जाता है। दूध को सफेद करने के लिए सफेद स्याही का उपयोग करतें है। अब अगर दूध को खोया बनाना हो तो उसमें आलू या फिर सोख्ता मिलाकर उसे जलाया जाता है।

चाँदी का वर्क लगा कर मिठाई को आकर्षक बनाया जाता है मगर चिकित्सकों के अनुसार चांदी शरीर के लिए पौष्टिक है। चांदी के चक्कर में दुकानदार लोगों को एल्युमीनियम की पन्नी लगी मिठाई खिलाते हैं। ये एल्युमीनियम शरीर में पहुंचने पर जहर का काम करता है। यह एक बार शरीर में जाने पर न तो घुलता है और न ही बाहर निकलता है। इससे लीवर, किडनी और आंत का कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। इतना ही नहीं इससे लोगों के घुटनों और ज्वाइंट में दर्द रहने लगता है। इससे व्यक्ति की मौत भी हो सकती है। मिठाई पर लगे वर्क को छुटाकर अंगुलियों से गोल-गोल घुमाएं। अगर यह चांदी से बना होगा तो यह पानी बनकर आपकी त्वचा में समा जाएगा। और इससे आपकी सेहत पर कोई विपरीत प्रभाव भी नहीं पड़ेगा, बल्कि यह आपको फायदा ही पहुंचाएगा। यदि इसकी गोली बन जाती है तो समझ लें कि यह एल्युमीनियम है और यह हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। इसलिए इससे दूरी बनाएं। इसके अलावा कोई दूध की मिठाई खाने में खट्टी या अजीब लगे तो फेंक दें। इसके अलावा घी की मिठाइयों के टेस्ट में बदलाव हो तो उन्हें भी न खाएं। खासकर कलर मिली हुई मिठाइयों के सेवन से बचें, ऐसी मिठाइयां अक्सर जांच के दौरान अधोमानक होती। आपको बता दें कि महराजगंज कस्बे से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक इन मिलावटखोरो की त्योहारो पर चांदी रहती है क्या इन पर कोई आलाधिकारी कार्यवाही करने में कामयाब रहेगा या इस वर्ष भी लोगो को मिलावट की मिठाइयां खानी पड़ेगी।

रिपोर्ट -विनय सिंह चौहान 

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